घाटी में आती शांति

जम्मू-कश्मीर की स्थिति तेजी से सामान्य होती जा रही है और उससे देश की विपक्षी पार्टियों और धारा 370 समर्थकों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। प्रतिबंधों में लगातार ढील दी जा रही है। अनेक स्थानों पर यातायात भी सामान्य नज़र आने लगा है। प्रशासन लोगों के लिए खाने-पीने के सामान के अलावा दूसरी जरूरी चीजों को उपलब्ध कराने में जुटा हुआ है। राज्य में की गई कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के मद्दे नज़र छुटपुट घटनाओं के अलावा राज्य में स्थिति नियंत्रण में है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी घाटी में रहकर न केवल सुरक्षा प्रबंधों को सँभालते नज़र आते हैं बल्कि खुद भी लोगों के बीच जाकर समय बिताते नज़र भी आ रहे हैं ।
इससे घाटी के लोग में सरकार के प्रति विश्‍वास बढ़ा है। वे इसके लिए केंद्र सरकार की खुलकर तारीफ भी कर रहे हैं, लेकिन देश की विपक्षी पार्टियों और उन लोगों में भारी बेचैनी है जो उम्मीद लगाए बैठे थे कि धारा 370 हटाने के बाद घाटी में भारी खून खराबा होगा, सरकार को अपने फैसले पर पछताना होगा, लेकिन ऐसा कुछ हुआ ही नहीं। बल्कि वहां के लोगों ने इस फैसले से घाटी को होने वाले फायदे को ज्यादा अहमियत दी है। वे अच्छी तरह से जानते हैं कि अगर घाटी में उद्योग लगेंगे तो इसका सीधा लाभ कश्मीर में युवाओं को मिलेगा। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, घाटी एक बार फिर पर्यटन की दृष्टि से गुलजार होगी। तीन दशकों से आतंक की विभीषिका झेल रहे लोगों को पता है कि रोजगार न होने के कारण ही उनके युवा भटक रहे हैं, लेकिन घाटी के लोगों का यह बदला हुआ रूप अनेक राजनीतिक दलों को हजम नहीं हो रहा। वे लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं जिससे हालात बिगड़ें।
अनेक दलों के नेता हर संभव प्रयास कर रहे हैं कि किसी तरह एक समुदाय को सरकार के खिलाफ खड़ा किया जाए। ऐसे ही हालात जम्मू-कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती के हैं। बात-बात पर केंद्र सरकार को धमकी देने वाले कश्मीर की शांति से इतने परेशान हुए कि आपस में ही उलझ गए। दोनों नेताओं को हरिनिवास गेस्ट हाउस में नजरबंद किया गया था। जहां वे इस हालात के लिए एक दूसरे को दोषी ठहराने लगे। हालात यहां तक बिगड़े कि उमर को वहां से शिफ्ट कर दिया गया। ऐसी हरकतों से साफ है कि वे किसी भी तरह से कश्मीर में फिर से पहले जैसे हालात पैदा करने की कोशिश में हैं। उन्हें अच्छी तरह से पता है कि लोग सरकार का साथ देंगे तो इससे घाटी तो गुलजार होगी, लेकिन उन्हें बोरिया-बिस्तर लपेटना होगा।