प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली/भाषा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि कश्मीर भारत का ‘मुकुटमणि’ है जिसकी पहचान बम, बंदूक और अलगाववाद की बना दी गई थी तथा उनकी सरकार ने क्षेत्र में शांति और तीव्र विकास के लिए अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को समाप्त किया।

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, कश्मीर भारत का मुकुटमणि है। कश्मीर की पहचान सूफी परंपरा और सर्व पंथ समभाव की है। कश्मीर की पहचान बम, बंदूक और अलगाववाद की बना दी गई थी। उन्होंने कश्मीर घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन की ओर संकेत करते हुए कहा, 19 जनवरी, 1990 की उस काली रात में कुछ लोगों ने कश्मीर की पहचान को दफना दिया था।

चर्चा के दौरान कई विपक्षी सदस्यों द्वारा जम्मू-कश्मीर के प्रमुख नेताओं को नजरबंद करने और अनुच्छेद 370 समाप्त करने को संविधान के विरुद्ध बताए जाने का उल्लेख करते हुए मोदी ने पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती के एक बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने कश्मीर के साथ धोखा किया है, ‘हमने जिस देश के साथ रहने का फैसला किया था, उसने हमें धोखा दिया है। ऐसा लगता है कि हमने 1947 में गलत चुनाव कर लिया था।’

प्रधानमंत्री ने महबूबा के इस बयान का हवाला देते हुए विपक्ष के सदस्यों से सवाल किया, ‘संविधान को मानने वाले लोग ऐसी बात को स्वीकार कर सकते हैं क्या?’

उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि अनुच्छेद 370 को हटाना ‘ऐसा भूकंप लाएगा कि कश्मीर भारत से अलग हो जाएगा तथा इससे कश्मीर के लोगों की आजादी का मार्ग प्रशस्त करेगा।’ प्रधानमंत्री ने सवाल किया कि क्या ऐसी बातों को कोई स्वीकार कर सकता है?

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ लोग अनुच्छेद 370 को समाप्त किए जाने पर इसलिए सवाल उठा रहे हैं क्योंकि उन्हें कश्मीर के लोगों पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा, हमने इस अनुच्छेद को समाप्त किया क्योंकि हमें कश्मीर के लोगों पर भरोसा है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल अगस्त माह में संसद ने अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और राज्य को जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख के अलग अलग केन्द्र शासित प्रदेशों में बांटने को अनुमति दी गई थी।

प्रधानमंत्री ने कहा, आज हम इस क्षेत्र में तीव्र गति से विकास कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। हम इस क्षेत्र में शांति को बाधित करने की अनुमति नहीं दे सकते। उन्होंने कहा, लद्दाख के लिए मेरे मन में चित्र साफ है। इसलिए हम चाहते हैं कि जिस प्रकार भूटान की प्रशंसा होती है, हम संकल्प लेते हैं कि हम लद्दाख को भी कार्बन न्यूट्रल इकाई के रूप में विकसित करेंगे।