उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू
उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू

नई दिल्ली/भाषा। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने प्रत्येक भारतीय के लिए सुरक्षा और देश की अखंडता को सर्वोपरि करार देते हुए कहा कि पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय वार्ता अब पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के मुद्दे पर ही होगी।

नायडू ने जम्मू-कश्मीर में हाल ही में निर्वाचित पंच और सरपंचों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान कहा, पाकिस्तान के साथ अब सिर्फ पीओके के मसले पर ही बातचीत होगी।

उपराष्ट्रपति कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार नायडू ने सरपंचों को संबोधित करते हुये इस बात पर जोर दिया कि प्रत्येक भारतीय के लिये सुरक्षा और राष्ट्र की एकता एवं अखंडता सर्वोपरि है।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 की अधिकतर धाराओं को पांच अगस्त को समाप्त किए जाने के बाद विभिन्न नागरिक सुविधाओं पर लगाए गए अस्थायी प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य उपद्रव और अशांति फैलाने की शरारती तत्वों की मंशा को नाकाम बनाना है।

उन्होंने कहा कि अब इन प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाया जा रहा है। इसके तहत संचार सुविधाएं भी चरणबद्ध तरीके से शुरू की जा रही हैं। नायडू ने कहा कि अनुच्छेद-370 हटने के बाद संघ शासित क्षेत्र घोषित किए गए जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख में विकास की गति जोर पकड़ेगी।

नायडू ने सरपंचों के साथ बैठक की जानकारी ट्विटर पर भी साझा करते हुये कहा, ‘आज अपने निवास पर जम्मू-कश्मीर से आए सरपंचों के शिष्टमंडल से मुलाकात की और संविधान का अनुच्छेद-370 हटने के बाद, क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों को तत्परता से जनसाधारण तक पहुंचाने के लिए निष्ठापूर्वक अथक प्रयास करने का आग्रह किया।’

उपराष्ट्रपति ने राज्य में मौजूदा हालात के बारे में कहा, ‘जम्मू-कश्मीर में लगाए गए अस्थायी प्रतिबंधों का उद्देश्य शरारती तत्वों द्वारा अशांति और उपद्रव की संभावना को रोकना तथा उसके कारण जान-माल की संभावित हानि से नागरिकों को बचाना है।’

उन्होंने राज्य में पंचायती राज व्यवस्था मजबूत होने के प्रति विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 हटाए जाने के बाद, वहां भी पंचायती राज से जुड़े संविधान के 73वें और 74वें संशोधनों के प्रावधान स्वत: लागू होंगे।

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