महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह
महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह

पटना/भाषा। महान गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह का लंबी बीमारी के बाद पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में गुरुवार को निधन हो गया। बिहार के भोजपुर जिले के बसंतपुर गांव निवासी 74 वर्षीय सिंह लंबे समय से सिजोफ्रेनिया रोग से पीड़ित थे और पीएमसीएच में उनका इलाज चल रहा था।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सिंह के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त की। शोक संदेश में उन्होंने कहा कि दिवंगत सिंह ने पूरे विश्व में भारत एवं बिहार का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि सिंह का निधन बिहार एवं देश के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की चिर-शांति तथा उनके परिजनों को दुख की इस घड़ी में धैर्य धारण करने की शक्ति प्रदान करने की ईश्वर से प्रार्थना की।

स्ट्रेचर पर रखना पड़ा शव
वशिष्ठ नारायण सिंह के भाई अयोध्या प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया कि पार्थिव शरीर को पटना स्थित उनके आवास ले जाने के लिए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रशासन ने समय पर एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करवाई, जिसके कारण शव को काफी देर तक स्ट्रेचर पर रखना पड़ा।

एक रिपोर्ट में इस आरोप का जिक्र है कि पार्थिव शरीर को पैतृक आवास पहुंचाने के लिए अस्पताल में मौजूद दलाल छह हजार रुपए की मांग कर रहे थे। हालांकि अस्‍पताल प्रबंधन ने लापरवाही से इंकार किया है। पीएमसीएच के अधीक्षक राजीव रंजन प्रसाद ने दावा किया कि उन्हें जैसे ही सूचना मिली, तुरंत एंबुलेंस उपलब्ध करवाई गई।

अमेरिका में भारत की प्रतिभा का कमाल
वशिष्ठ नारायण सिंह ने बर्कले के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय से वर्ष 1969 में गणित में पीएचडी की थी। उन्होंने ‘साइकिल वेक्टर स्पेस थ्योरी’ पर शोध किया था। वे वॉशिंगटन में गणित के प्रोफेसर थे लेकिन वर्ष 1972 में भारत लौट आए थे।उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर और भारतीय सांख्यिकीय संस्थान, कोलकाता में अध्यापन का कार्य किया। वे बिहार के मधेपुरा जिला स्थित भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के विजिटिंग प्रोफेसर भी रहे थे।

उन्होंने आंइस्टीन के सापेक्ष सिद्धांत को चुनौती दी थी। उनकी अद्भुत गणना क्षमता के बारे में कई कहानियां सुनने को मिलती हैं। कहा जाता है कि नासा में अपोलो की लॉन्चिंग से पहले जब 31 कम्प्यूटरों में कुछ समय के लिए कोई तकनीकी खामी आ गई थी तो गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह ने गणना की, जो बाद में सही पाई गई।

किताबों से गहरा लगाव
वशिष्‍ठ नारायण सिंह 1974 में मानसिक बीमारी के इलाज के लिए कांके के अस्पताल में भर्ती कराए गए। वे 1989 में गढ़वारा (खंडवा) स्टेशन से लापता हो गए। एक रिपोर्ट के अनुसार, वे 7 फरवरी, 1993 को छपरा के डोरीगंज में एक झोपड़ीनुमा होटल के बाहर प्लेट साफ करते पाए गए थे। वे करीब 40 साल तक सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित रहे। उन्हें किताब, कॉपी और एक पेंसिल से बहुत लगाव था और दुनिया को अलविदा कहने से कुछ दिन पहले तक ये चीजें उनके पास थीं। उन्हें किताबों से इतना ज्यादा लगाव था कि जब अमेरिका से स्वदेश आए तो अपने साथ दस बक्से किताबें लेकर आए।

सीएम ने अर्पित की श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पटना के कुल्हड़िया कॉम्पलेक्स पहुंचकर सिंह की पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित किए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने सिंह के भाई अयोध्या प्रसाद सिंह, भतीजे राकेश कुमार सिंह सहित अन्य परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया।

मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से कहा, वशिष्ठ बाबू की मृत्यु हम सब लोगों के लिए दुखद है। वे कम उम्र में ही अस्वस्थ हो गए थे। आज वे नहीं रहे, इससे पूरे प्रदेश के लोग दुखी हैं। उनका अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जा रहा है। हम लोग इस बारे में भी सोचेंगे कि उनका नाम सदैव लोग याद रख सकें।