सांकेतिक चित्र
मोटापा

लंदन/भाषा। मधुमेह (टाइप 2) का पता लगने के पांच साल के भीतर यदि संबंधित व्यक्ति अपने वजन को 10 प्रतिशत या ज्यादा वजन घटा लेता है तो इस रोग के शमन की संभावना बहुत प्रबल रहती है। एक नए शोध में यह दावा किया गया है।

इसमें कहा गया है कि ऐसा करते हुए जीवनशैली में व्यापक बदलाव या कैलोरी को लेकर अत्यधिक सतर्कता के बिना भी इससे उबर पाना मुमकिन है।

‘डाइबेटिक मेडिसीन’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, मधुमेह टाइप-2 रोग से दुनिया भर में 40 करोड़ से ज्यादा लोग प्रभावित होते हैं। इससे हृदय संबंधी बीमारी, हृदयाघात, दृष्टिहीनता और सर्जरी के जरिए शरीर के किसी हिस्से को हटाने आदि का खतरा बढ़ जाता है।

अध्ययन में ब्रिटेन के कैंब्रिज विश्वविद्यालय के शोधार्थी भी शामिल थे। उनका कहना है कि दूसरी श्रेणी वाले मधुमेह पर जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव और ध्यान आदि के जरिए काबू पाया जा सकता है। कैलोरी पर नजर रखकर और वजन घटाकर मरीज रक्त शर्करा के उच्च स्तर को भी सामान्य स्तर पर ला सकते हैं ।

अध्ययन से प्रमाणित हुआ कि हाल में जिनकी बीमारी का निदान हुआ ऐसी स्थिति में लगातार आठ हफ्ते तक 700 कैलोरी तक कम कैलोरी वाले रोजाना के भोजन से दस में से नौ लोग इससे उबर गए। लंबे समय तक जिनको यह बीमारी थी, उनकी संख्या भी आधी रह गई।