जंक फूड
जंक फूड

नई दिल्ली/भाषा। बर्गर, पिज्जा और नूडल्स सहित अन्य फास्ट फूड का स्वाद सेहत के लिए खतरा साबित हो रहा है। अग्रणी शोध संस्था सेंटर फॉर सांइस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की एक ताजा अध्ययन रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, बाजार में उपलब्ध लगभग सभी नामी कंपनियों के जंक फूड में नमक और वसा की मात्रा निर्धारित सीमा से खतरनाक स्तर तक ज्यादा पाई गई है।

इस रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एफएसएसएआई ने एक बयान में कहा कि उसने जंक फूड से संबंधित नियमों को गंभीरता से लिया है और टिप्पणियों के लिए जनता में पहले ही मसौदा अधिसूचना तैयार कर ली है।

उसने एक बयान में कहा, हमने स्कूलों तथा उसके 50 मीटर के दायरों में जंक फूड पर प्रतिबंध सुनिश्चित करने में इन नियमों को लागू करने की संभावनाएं तलाश करने के लिए अपने क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ ही राज्य सरकार को परामर्श भी जारी किया है। जल्द ही मसौदा अधिसूचना को अधिसूचित किया जाएगा और हम कार्यान्वय के तरीकों पर विचार करेंगे। एफएसएसएआई स्कूलों के साथ-साथ एक परामर्श समिति गठित करने पर काम कर रहा है जो इसका कार्यान्वयन देखेगी।

सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने मंगलवार को ‘कोड रेड’ शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट के हवाले से बताया कि भारतीय बाजार में उपलब्ध अधिकतर पैकेट बंद खाना और फास्ट फूड में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के मानकों से बहुत ज्यादा है।

नारायण ने संवाददाताओं को बताया कि एफएसएसएआई ने फास्ट फूड कंपनियों को इन उत्पादों में इस्तेमाल किए गए खाद्य पदार्थों का मात्रा पैकेट पर दर्शाने के लिए इस साल जुलाई में दिशानिर्देश तैयार किए थे, लेकिन सरकार ने इन्हें अब तक अधिसूचित कर लागू नहीं किया है।

उन्होंने बताया शोध में चिप्स, नूडल्स, पिज्जा, बर्गर और नमकीन सहित अन्य फास्ट फूड के सभी अग्रणी कंपनियों के 33 उत्पादों की प्रयोगशाला जांच में पाया गया कि इनमें नमक और वसा की मात्रा खतरनाक स्तर पर इस्तेमाल की जा रही है। सभी 33 लोकप्रिय जंकफूड में कोई भी उत्पाद निर्धारित मानकों के पालन की कसौटी पर खरा नहीं उतर सका।

नारायण ने कहा कि सरकार ने 2013 में इस विषय पर फास्ट फूड कंपनियों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने के लिए एफएसएसएआई के विशेषज्ञों की एक समिति गठित की थी। उन्होंने कहा कि पिछले सात साल में तीन समितियां गठित हो चुकी हैं लेकिन अब तक कोई ठोस कानूनी पहल नहीं हुई।

फास्ट फूड कंपनियों द्वारा निर्धारित मात्रा में इन तत्वों के इस्तेमाल से परहेज होने के कारण के सवाल पर नारायण ने कहा, नमक, वसा और शर्करा सहित अन्य तत्वों की मात्रा निर्धारित मानकों का पालन स्वाद पर भारी पड़ता है, इसलिये कंपनियां स्वाद के साथ कोई समझौता करने को तैयार नहीं है। ऐसे में सरकार दुनिया की इन नामी कंपनियों के दबाव में कानून बनाकर एफएसएसएआई के मानकों का पालन करने के लिए (उन्हें) मजबूर करने से बच रही है।

उन्होंने कहा कि जंक फूड में नमक, शर्करा और वसा सहित अन्य तत्वों की निर्धारित मात्रा के मुताबिक इस्तेमाल की मात्रा का इन उत्पादों के पैकेट पर स्पष्ट उल्लेख करने के लिए कानूनी बाध्यता को तत्काल लागू करने की जरूरत है। नारायण ने कहा कि जनस्वास्थ्य पर कंपनियों का हित भारी नहीं पड़े, इसके लिए फास्ट फूड उत्पादों में नमक, शर्करा और वसा का निर्धारित मात्रा से अधिक इस्तेमाल होने पर तंबाकू उत्पादों की तर्ज पर स्पष्ट चेतावनी (रेड वार्निंग) पैकेट पर दर्ज करने को अनिवार्य बनाया जाए।