अजय आलोक
अजय आलोक

नागरिकता संशोधन विधेयक पर जदयू में छिड़ा घमासान

पटना/दक्षिण भारत। नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर जदयू में घमासान छिड़ गया है। जहां पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस विधेयक का समर्थन कर चुके हैं, वहीं जदयू उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर अलग ही बयान दे रहे हैं। उन्होंने इस विधेयक को भेदभाव पर आधारित करार दिया है।

कुछ ऐसे ही विचार जदयू के वरिष्ठ नेता पवन वर्मा के भी हैं जिन्होंने इस विधेयक को गैर-संवैधानिक, भेदभावपूर्ण और देश की एकता के खिलाफ बताया है। इन दोनों नेताओं के ​बयानों पर पार्टी के पूर्व प्रवक्ता अजय आलोक ने कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने इसे प्रशांत किशोर और पवन वर्मा की निजी भावना बताते हुए कि कहा अब आगे की कार्रवाई नीतीश कुमार को तय करनी है।

अजय आलोक ने प्रशांत किशोर से सवाल किया कि क्या वे नीतीश कुमार से ज्यादा पार्टी का संविधान जानते हैं। उन्होंने प्रशांत किशोर से कहा कि राजनीति और व्यवसाय साथ नहीं चलते। ऐसे में वे (प्रशांत किशोर) या तो राजनीति करें अथवा व्यवसाय, दोनों को मिलाएं नहीं।

अजय आलोक ने नागरिकता संशोधन विधेयक को सही कदम बताते हुए उन लोगों को संवेदनहीन करार दिया जो इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने इस विधेयक पर पार्टी के रुख को लेकर कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार सबसे सलाह लेकर ही इसे निश्चित करते हैं।

बता दें कि जदयू में यह विवाद प्रशांत किशोर और पवन वर्मा के ट्वीट के बाद सामने आया। प्रशांत किशोर ने कहा था, ‘यह देखकर काफी निराश हूं कि जदयू नागरिकता संशोधन विधेयक का समर्थन कर रही है, जो धर्म के आधार पर नागरिकता के अधिकार में भेदभाव करता है। जदयू द्वारा इस विधेयक को समर्थन पार्टी के संविधान के भी खिलाफ है, जिसके पहले ही पन्ने पर धर्मनिरपेक्षता शब्द तीन बार लिखा है। इसके अलावा यह पार्टी की लीड​रशिप के भी खिलाफ है जो गांधी के आदर्शों पर चलती है।’

वहीं, पवन वर्मा ने कहा, ‘मैं नीतीश कुमार से अपील करता हूं कि नागरिकता संशोधन विधेयक पर पार्टी के समर्थन पर राज्यसभा में एक बार फिर विचार करें। यह विधेयक गैर-संवैधानिक, भेदभावपूर्ण और देश की एकता और सद्भाव के खिलाफ है।’ पवन वर्मा ने इस विधेयक को धर्मनिरपेक्षता के सिद्धातों के खिलाफ बताया। साथ ही कहा कि इसे तो गांधीजी भी खारिज कर देते। बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक लोकसभा से पारित हो चुका है। बुधवार को यह राज्यसभा में पेश किया जाएगा।