नुकसान हुआ तो हुआ
नुकसान हुआ तो हुआ

श्रीकांत पाराशर

हालांकि भाजपा वाले सैम पित्रोदा को राहुल गांधी का सलाहकार और उनके पिता स्व. राजीव गांधी का गुरु बताते हैं परंतु देश की जनता, जो कि सोशल मीडिया पर हरदम खूब सक्रिय रहती है वह तो सैम पित्रोदा को मणिशंकर अय्यर का ही अवतार बता रही है। लोग कहते हैं कि आजकल मणिशंकर को कांग्रेस ने कहीं छुपाकर रखा है ताकि वह कोई अंटशंट बयान देकर कांग्रेस का भट्ठा न बिठा सके।

पिछली बार आम चुनावों में मोदी को चाय की रेहड़ी लगवाने की बात मणिशंकर ने क्या कही कि अभी तक भी कांग्रेस उसका खामियाजा भुगत रही है। बीच में एक दौर तो ऐसा आया था कि बड़े बड़े कांग्रेसी नेता मोहल्लों नुक्कड़ों पर पकोड़े तलते देखे गए। वैसे यह ठीक तो नहीं हुआ। परंतु क्या करें, हुआ तो हुआ। हालांकि पकोड़े तलने वाले कांग्रेसी, मोदी के एक बयान के विरोध में ऐसा कर रहे थे लेकिन आप और हम किस किसका मुंह बंद कर सकते हैं, लोग तो यहां तक कहने लगे कि यह मोदी है, कुछ भी करवा सकता है। देखो, कांग्रेसियों से पकोड़े भी तलवा दिए। यह कोई मामूली बात नहीं है, लेकिन मोदी है तो मुमकिन है।

संपादक की कलम से
संपादक की कलम से

यह सब क्यों हुआ, कोई गहराई से नहीं सोचता। लेकिन क्या करें, हुआ तो हुआ। दूध का जला छाछ को फूंक फूंक कर पीता है इसलिए इस बार कांग्रेस संभल संभल कर बोल रही है। हालांकि राहुल को एक बयान पर उच्चतम न्यायालय से माफी भी मांगनी पड़ी थी और कांग्रेस को लगा था कि मामला रफादफा हो गया है। इतने में ही अचानक सैम पित्रोदा न जाने कहां से कूद पड़े।

उन्होंने 1984 के सिख दंगों पर कह दिया हुआ तो हुआ। बस भाजपा ने मुद्दा लपक लिया। शाम होने तक तो कांग्रेस को भाजपाइयों और सोशल मीडियाइयों ने इतना घेरा कि वे इस बयान से अपनी पार्टी को होनेवाले नुकसान का हिसाब लगाने काबिल भी नहीं रहे। खूब नुकसान हुआ। परंतु क्या करें हुआ तो हुआ। यह सब जानते हैं कि कांग्रेस के पास मणिशंकर अय्यर, दिग्विजय सिंह, सैम पित्रोदा, नवजोत सिंह सिद्दू जैसे उनके अपने ही लोग, कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने में पूरी तरह सक्षम हैं तो उन्हें बाहर वालों की क्या जरूरत है?

कांग्रेस के पास ऐसे हितैषी नेताओं की कोई कमी नहीं। बल्कि एक लंबी सूची है जिनके बोलने से फूल झड़ते हैं और यह पुष्पवर्षा उन्हीं की पार्टी को नुकसान पहुंचाती है। कुछ वर्षों पूर्व दिग्विजय ने हिन्दू आतंकवाद को जन्म दिया था परंतु अब उनका वह अन्वेषण एक जुमला ही साबित हुआ है। न्यायालय में ऐसा कोई आतंकवाद साबित नहीं हो सका। अब भोपाल में वही हिन्दू आतंकवाद कांग्रेस के गले की फांस बन गया है। कथित हिन्दू आतंकवाद की आरोपी के रूप में जिस साध्वी प्रज्ञा ने कांग्रेस की कृपा से जेल में यातनाएं सही थीं और जिन्हें दिग्विजय सबक सिखाना चाहते थे वही साध्वी अब आम चुनावों में उन्हीं दिग्विजय को सबक सिखाने के लिए रात दिन एक किए हुए है।

जिन दिग्विजय की डिक्शनरी में कभी हिन्दू शब्द ही नहीं हुआ करता था वही दिग्विजय अब साधुओं से हठयोग के माध्यम से जीत का जुगाड़ कर रहे हैं। यज्ञ करवाकर साधुओं से आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। एक हिन्दू विरोधी व्यक्ति हिन्दुओं का आशीर्वाद प्राप्त कर रहा है। ऐसा जबरदस्त बदलाव कैसे हुआ? मगर, हुआ तो हुआ।

इन चुनावों में बहुत सारे मुद्दे उठे और उनका जिन जिनको नुकसान होना था, हुआ। हुआ तो हुआ। क्या कर सकते हैं? खूंखार आतंकी मसूद अजहर को बरसों पूर्व भाजपा सरकार विमान में बिठाकर कांधार छोड़कर आई थी, इस पर कांग्रेस आज भी जब तब चुटकियां ले लेकर भाजपा को चिढ़ाती रहती है। हाल तक भाजपा इस मुद्दे पर निरुत्तर हो जाती थी।

अब मोदी सरकार के प्रयासों से वही मसूद अजहर अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित किया जा चुका है। अब कांग्रेस का बोलना अचानक बंद हुआ्। हुआ तो हुआ। इसके पहले पुलवामा हुआ तो विपक्ष का हंगामा भी हुआ्। भाजपा और मोदी को विपक्ष ने घेरा और खूब लताड़ा। इस्तीफे की मांग तक कर डाली। बाद में इसी मोदी सरकार ने बालाकोट किया। आतंकियों को तबाह कर दिया। भाजपा ने कहा, चुप क्यों हो, अब क्या हुआ? कांग्रेस ने कहा, हुआ तो हुआ।

इससे पहले भारत ने पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक की। सेना ने आतंकियों को घर में घुसकर मारा तो कांग्रेस ने इस स्ट्राइक का मखौल भी उड़ाया और सबूत भी मांगे। मोदी पर किया गया यह हमला बूमरेंग बनकर वापस कांग्रेस के गले पड़ा तो कांग्रेस ने कहा, हमने भी ऐसी बहुत सारी सर्जिकल स्ट्राइक की थीं। लोग आश्चर्य से बोले कि आपने भी ऐसा किया और देश की जनता को पता ही नहीं चला? ऐसा क्या हुआ और क्यों हुआ? कांग्रेस ने कहा, हुआ तो हुआ।

अभी एनसीपी के राष्ट्रीय मुखिया शरद पवार ने कहा कि उन्होंने जब मतदान किया तब उन्होंने बटन तो दबाया अपनी पार्टी का और वोट चला गया कमल को। इस पर उनको किसी ने ध्यान दिलाया कि उनके मतदान केन्द्र में तो भाजपा का उम्मीदवार ही नहीं था, वहां तो भाजपा सहयोगी शिवसेना का उम्मीदवार था जिसका चुनावचिन्ह तीरकमान है, न कि कमल। तो फिर कमल का चिह्न कहां से आया? ऐसा कैसे हुआ? पवार बोले, हुआ तो हुआ। एक जमाने में इन्हीं शरद पवार ने सोनिया गांधी को विदेशी नागरिक बताते हुए उनका इतना प्रबल विरोध किया था कि वे खुद कांग्रेस से बाहर चले गए थे। उन्होंने अपनी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का गठन कर लिया था। इस बार उन्होंने तो नहीं, परंतु भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने राहुल गांधी की दोहरी नागरिकता का मुद्दा उठाया। इस पर गृह मंत्रालय ने राहुल को नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांगा।

राहुल ने फिलहाल कोई जवाब तो नहीं दिया है परंतु वे अचंभित अवश्य हैं कि यह भारत में हो क्या रहा है? मतलब, पहले ऐसे सवाल उठाने की किसकी हिम्मत थी। उधर, राहुल की बहन प्रियंका वाड्रा कहती हैं कि राहुल का जन्म भारत में हुआ, सबके सामने हुआ, सब भारतवासियों को पता है फिर वह विदेशी कैसे हो सकते हैं? अब लोग कह रहे हैं कि राहुल का जन्म भारत में हुआ तो हुआ परंतु वे फिर विदेश के नागरिक कैसे हुए? उन्होंने वहां कंपनी में अपनी नागरिकता ब्रिटेन की कैसे बताई? ऐसा कैसे हुआ? तो कांग्रेस ने कहा, हुआ तो हुआ्।

इन चुनावों में मोदी का एक से बड़ा एक इंटरव्यू हुआ्। सबसे आगे रहने के लिए हर चैनल ने अपने इंटरव्यू को सबसे बड़ा बताया, सबसे अलग, सबसे अनूठा बताया। मोदी ने इस बार किसी को नाराज नहीं किया। सबको इंटरव्यू दिया, जमकर दिया, मैराथन इंटरव्यू दिया। तीखे सवाल पूछने वालों को तीखे जवाब भी दिए, भले ही एंकर हंसकर अपनी झेंप टाल गए। छोटे बड़े हर चैनल का इंटरव्यू हुआ्। मोदी के इंटरव्यू का दौर पर दौर हुआ्। हुआ तो हुआ। और हां, उधर कांग्रेस में अब चुनाव के अंतिम दौर में राहुल के कहने पर पित्रोदा को माफी तो मांगनी ही पड़ी है, दरकिनार भी हुआ। क्या कर सकते हैं। हुआ तो हुआ।

देश-दुनिया की हर ख़बर से जुड़ी जानकारी पाएं FaceBook पर, अभी LIKE करें हमारा पेज.

1 COMMENT

  1. नमस्ते। कांग्रेस के साथ जो हुआ वह अच्छा नहीं हुआ। हुआ तो हुआ। आप बात बे बात लिखते रहिये।

LEAVE A REPLY

18 − 10 =