गर्मी से परेशान लोगों को जुर्माना देना मंजूर, हेल्मट पहनना नहीं

बेंगलूरु। लगभग पूरा देश इन दिनों भीषण गर्मी झेल रहा है। गर्मी का आलम यह है कि कुछ लोग इसकी वजह से अपनी जान तक जोखिम में डालने से गुरेज नहीं कर रहे। बेंगलूरु में गर्मी की वजह से कई लोगों ने हेल्मेट पहनना बंद कर दिया है। पक़डे जाने पर उन्हें ट्रैफिक पुलिस को फाइन देना तो मंजूर है, पर हेल्मेट पहनना नहीं। कुछ लोग यह मांग भी कर रहे हैं कि गर्मियों के दौरान पुलिस को हेल्मेट पहनने के नियम में ढील देनी चाहिए।पुलिस के आंक़डों के मुताबिक, जनवरी और फरवरी २०१७ में पुलिस ने बिना हेल्मेट गा़डी चलाने के ६ लाख मामले दर्ज किए थे। अकेले मार्च में यह आंक़डा ४ लाख तक पहुंच गया और अप्रैल के महीने इसके और ब़ढने की आशंका है। झुलसाने वाली गर्मी और पसीने के वजह से दोपहिया वाहन चालक हेल्मेट पहनने से बच रहे हैं। पक़डे जाने पर ऐसे लोगों से पुलिस १०० रुपए का जुर्माना वसूलती है।पक़डे जाने पर ज्यादातर लोग कहते हैं कि वह जुर्माना देने के लिए तैयार हैं, पर हेल्मेट पहनना उनके लिए काफी मुश्किल हो रहा है। जयनगर में रहने वाली शिल्पा रघुनंदन भी ऐसे लोगों में से एक हैं। उन्होंने कहा, मैं स्कूटर से अपने बच्चों को स्कूल छो़डने और लेने जाती हूं। पहले मैं हेल्मेट पहना करती थी, लेकिन अब तो सुबह के वक्त भी इस गर्मी में घर से निकलना मुश्किल हो रहा है। मैं फाइन देने को तैयार हूं, पर खींझ दिलाने वाली गर्मी में हेल्मेट नहीं पहन सकती।ट्रैफिक सिग्नल पर रुकने के दौरान भी ज्यादातर बाइक चलाने वाले लोग हेल्मेट उतार देते हैं, ताकि कुछ देर राहत महसूस कर सकें। एक अन्य निवासी राजेंद्र बाबू जो कि पेशे से वकील हैं, कहते हैं कि जब भी ट्रैफिक सिग्नल पर रेड लाइट होती है, वह हेल्मेट उतार देते हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान भी कई बार पुलिस ने उन्हें ऐसा करने से रोका है। हालांकि, पुलिस इस बात से इनकार कर रही है कि गर्मी के चलते बिना हेल्मेट बाइक चलाने के मामले ब़ढे हैं। ट्रैफिक पुलिस के अडिशनल कमिश्नर आर. हितेंद्र का कहना है कि पुलिस ऐसे मामलों पर अब सख्त कार्रवाई कर रही है, इसलिए ऐसे मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं।

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