सांकेतिक चित्र
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नई दिल्ली/भाषा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय वायु सेना के एक विमान में जैव ईंधन के इस्तेमाल को मुमकिन बनाने के कारनामे का रविवार को जिक्र करते हुए कहा कि इस तरह के प्रयास कच्चे तेल के आयात में कमी लाने के उपायों को कारगर बनाने में मददगार साबित होंगे।

मोदी ने आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में अपने संबोधन में कहा, ‘31 जनवरी 2020 को लद्दाख़ की खूबसूरत वादियां, एक ऐतिहासिक घटना की गवाह बनीं। लेह के कुशोक बाकुला रिम्पोची हवाईअड्डे से भारतीय वायुसेना के एएन-32 विमान ने जब उड़ान भरी तो एक नया इतिहास बन गया।’

उन्होंने कहा, ‘इस उड़ान में 10 प्रतिशत जैव ईंधन का मिश्रण किया गया था। ऐसा पहली बार हुआ जब विमान के दोनों इंजनों में इस मिश्रण का इस्तेमाल किया गया। यही नहीं, लेह के जिस हवाईअड्डे पर इस विमान ने उड़ान भरी, वह न केवल भारत में, बल्कि दुनिया में सबसे ऊंचाई पर स्थित एयरपोर्ट में से एक है।’

मोदी ने इस कवायद के खास पहलू का जिक्र करते हुए कहा, ‘ख़ास बात यह है कि विमान में इस्तेमाल किया गया जैव ईंधन पेड़ से निकाले गए तेल से तैयार किया गया है। इसे भारत के विभिन्न आदिवासी इलाकों से खरीदा जाता है।’ उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, बल्कि कच्चे-तेल के आयात पर भी भारत की निर्भरता कम हो सकती है।

प्रधानमंत्री ने वैज्ञानिकों की इस खोज को सराहनीय बताते हुये कहा, ‘मैं इस बड़े कार्य से जुड़े सभी लोगो को बधाई देता हूं। विशेष रूप से देहरादून स्थित भारतीय पेट्रोलियम संस्थान के वैज्ञानिकों को, जिन्होनें जैव ईधन से विमान उड़ाने की तकनीक को संभव कर दिया। उनका ये प्रयास ‘मेक इन इंडिया’ को भी सशक्त करता है।’

इस दौरान उन्होंने युवाओं के विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति बढ़ती रुचि का भी जिक्र करते हुए कहा, अंतरिक्ष में उपग्रह प्रक्षेपण में बनते नए-नए रिकॉर्ड, नए-नए अभियान हर भारतीय को गर्व से भर देते हैं।

उन्होंने चंद्रयान-2 मिशन के समय बेंगलुरु में उपस्थित बच्चों के उत्साह की सराहना करते हुए कहा, ‘उन बच्चों में विज्ञान, प्रोद्योगिकी और नवाचार को लेकर जो उत्सुकता थी वो कभी हम भूल नहीं सकते हैं।’

प्रधानमंत्री ने बच्चों और युवाओं में विज्ञान के प्रति झुकाव को बढ़ाने के लिए एक नई व्यवस्था शुरू करने की जानकारी साझा करते हुए बताया, ‘अब आप श्रीहरिकोटा से होने वाले रॉकेट प्रक्षेपण को सामने बैठकर देख सकते हैं। हाल ही में, इसे सबके लिए खोल दिया गया है। इसमें आगंतुक दीर्घा बनाई गई है जिसमें 10 हज़ार लोगों के बैठने की व्यवस्था है।’

मोदी ने बताया कि इसरो की वेबसाइट पर दिए गए लिंक के ज़रिए इसकी ऑनलाइन बुकिंग भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों से आग्रह करूंगा कि आने वाले समय में वे इसका लाभ जरूर उठाएं।

इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने नमो एप पर झारखंड के एक युवक के सुझाव पर इसरो के ‘युविका’ कार्यक्रम के बारे में बताया कि स्कूली छात्रों को विज्ञान से जोड़ने के लिए 2019 में इसरो ने ‘युवा विज्ञानी कार्यक्रम’ (युविका) शुरू कर एक सराहनीय प्रयास किया है।

उन्होंने कहा, यह कार्यक्रम हमारी ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान’ की संकल्पना के अनुरूप है। इसमें, परीक्षा के बाद, छुट्टियों में छात्र, इसरो के अलग-अलग केंद्रों में जाकर अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बारे में सीखते हैं। उन्होंने युवाओं से इस कार्यक्रम से जुड़ चुके छात्रों के अनुभवों को जानने की अपील करते हुए इस कार्यक्रम से जुड़ने का सुझाव दिया।