भारतीय जनता पार्टी
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नई दिल्ली/दक्षिण भारत। आम आदमी पार्टी (आप) ने 62 सीटों के साथ राष्ट्रीय राजधानी की सत्ता में एक बार फिर वापसी की। उसे साल 2015 के मुकाबले 5 सीटों का नुकसान हुआ। वहीं, भाजपा को इस बार पांच सीटों का फायदा हुआ और वह 8 का आंकड़ा छू सकी। हालांकि, भाजपा का प्रदर्शन उसके दावे के अनुरूप नहीं रहा, लेकिन इस बीच एक खबर उसके कार्यकर्ताओं को जरूर उत्साहित कर सकती है।

इस बार भाजपा का वोट शेयर बढ़ा है। इसका मतलब है कि चुनाव हारने के बावजूद यह पार्टी पिछली बार के मुकाबले ज्यादा लोगों तक अपनी पहुंच बनाने मेंं सफल हुई है। चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक, कुल डाले गए वोटों में से ‘आप’ 53.57 प्रतिशत वोट पाने में सफल रही। दूसरी ओर, भाजपा 38.51 प्रतिशत वोट पाकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।

मतदाता रूठे, शून्य तक सिमटी कांग्रेस
अगर कोई पार्टी सबसे ज्यादा नुकसान में रही तो वह कांग्रेस है, जिसने तीन बार लगातार दिल्ली में जीत का परचम लहराया, लेकिन वह पिछले दो विधानसभा चुनावों में शून्य तक सिमट गई है। इस बार उसे सिर्फ 4.26 प्रतिशत वोट मिले, जो उसका अब तक का सबसे कमजोर प्रदर्शन है। आंकड़े यह बयान करते हैं कि जो वोट अब तक कांग्रेस को सत्ता तक पहुंचाता रहा है, उसने इसका साथ छोड़ दिया है।

भाजपा ने बनाई बढ़त
वहीं, भाजपा विधानसभा चुनाव हारने के बाद भी अपना वोट शेयर बढ़ाने में सफल रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो उसने ज्यादातर विधानसभा क्षेत्रों में पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में बढ़त बनाई और उसका वोट शेयर भी बढ़ा है। आठ सीटों पर उसके प्रत्याशी जीते और 63 सीटों पर उसके वोट शेयर में वृद्धि हुई है। अगर 2015 के विधानसभा चुनाव नतीजों से तुलना करें तो 20 सीटों पर भाजपा का वोट शेयर 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गया है।

भाजपा के वोट शेयर में सबसे ज्यादा इजाफा नजफगढ़ सीट पर देखने को मिला, जहां यह 21.5 प्रतिशत तक बढ़ गया है। ‘आप’ ने अच्छे बहुमत के साथ सत्ता में जरूर वापसी की, लेकिन वोट शेयर की बात करें तो आंकड़े कुछ चौंकाने वाले हैं। दिल्ली की 38 सीटों पर ‘आप’ का वोट शेयर घट गया है।

यहां घटा/बढ़ा ‘आप’ का वोट शेयर
‘आप’ ने 5 सीटों पर अपने वोट शेयर में 10 प्रतिशत से ज्यादा इजाफा जरूर किया है। इसके अलावा मुस्तफाबाद सीट पर वोट शेयर 23 प्रतिशत तक बढ़ गया है। मटिया महल, चांदनी चौक, बल्लीमरान और सीलमपुर सीटें जहां मुस्लिम आबादी की काफी तादाद है, वहां भी ‘आप’ के वोटों में काफी बढ़त दर्ज की गई।

करावल नगर में ‘आप’ का वोट शेयर सबसे ज्यादा घटा है। यहां पिछली बार की तुलना में उसके खाते में 13.5 प्रतिशत वोट कम पड़े। राष्ट्रीय राजधानी की 27 सीटें ऐसी थीं जहां ‘आप’ एवं भाजपा दोनों के ही वोट शेयर में बढ़ोतरी हुई।

खूब जब्त हुईं कांग्रेस प्रत्याशियों की जमानतें
विधानसभा चुनाव नतीजों के बाद कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन खूब चर्चा में रहा। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने कई रोचक तस्वीरें शेयर कर कांग्रेस को निशाने पर लिया। यह पार्टी लगातार दूसरी बार यहां अपना खाता खोलने में विफल रही है। 63 सीटों पर तो उसके उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। उसने 66 सीटों पर चुनाव लड़ा था और चार सीटें सहयोगी के लिए छोड़ीं।

कांग्रेस को 63 सीटों पर अपने वोट शेयर का नुकसान उठाना पड़ा। इस पार्टी को वोट शेयर के लिहाज से सबसे तगड़ा झटका मुस्तफाबाद में लगा जो ‘आप’ के खाते में चला गया। इस तरह यहां कांग्रेस का वोट शेयर 28.8 प्रतिशत घट गया। कांग्रेस को कस्तूरबा नगर से कुछ राहत मिली, यहां उसका वोट शेयर 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गया। हालांकि, वोट शेयर में यह वृद्धि भी उसका खाता नहीं खोल सकी और कांग्रेस को शून्य से ही संतोष करना पड़ा।