कर्मयोग से खोलें बंद किस्मत के ताले : राष्ट्रसंत ललितप्रभ

हुब्बल्ली। राष्ट्रसंत श्री ललितप्रभसागरजी महाराज ने कहा है कि सफलता का राज केवल इतना सा है कि भगवान ने इंसान को जितनी ताकत दी है अगर वह पूरी ताकत झौंक दे तो उसे आगे ब़़ढने से कोई नहीं रोक सकता। कोई प्रयास करे और उसे परिणाम न मिले, ऐसा कभी नहीं हो सकता, हाँ उसमें देर-सवेर अवश्य हो सकती है। भले ही हथौ़डे की पहली चोट से पत्थर न टूटे और दसवीं चोट में परिणाम आए, इसका मतलब यह नहीं कि नौ चोटें निष्फल गई। नौ चोटों ने प्रयास किया और दसवीं चोट से परिणाम आया। याद रखें, कोई भी परिश्रम और प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाता। संतश्री ने कहा कि अगर कर्म फूटा इंसान भी कठोर पुरुषार्थ करना शुरू कर दे तो वह भी बंद किस्मत के तालों को खोल सकता है। संतश्री सोमवार को गोल्ड जिम हॉल में श्री आदिनाथ जिन मंदिर एवं दादावा़डी ट्रस्ट द्वारा आयोजित सत्संगमाला के पांचवें दिन ‘कैसे खोलें-बंद किस्मत के ताले’’ विषय पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि दुनिया में केवल पाँच प्रतिशत लोग जन्म से किस्मत लेकर साथ आते हैं। आज विश्व में जितने भी अमीर लोग हैं उनमें से सत्तर प्रतिशत लोग ऐसे हैं जिनका जन्म किसी गरीब और कच्ची बस्ती में हुआ था, पर अपनी महान सोच, ऊँचे लक्ष्य, और कर्मयोग के चलते वे सबके सिरमौर बन बैठे। उन्होंने कहा कि किस्मत बनाने या बिगा़डने वाला इंसान स्वयं है। जीवन में भाग्य और मेहनत की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए संतश्री ने कहा कि भाग्य पिता की तरह और मेहनत माँ की तरह है। पिता के बलबूते जीवन की शुरुआत होती है, पर माँ के बलबूते जीवन का निर्माण होता है। जैसे बच्चे के पैदा होने में पिता की भूमिका कण भर है और माँ की भूमिका मणभर। ठीक वैसे ही जीवन के विकास में किस्मत पिता जितनी सहयोगी है तो पुरुषार्थ माँ जितना लाभकारी है। युवाओं को झकझोरते हुए उन्होंने कहा कि वे बाप की और पाप की कमाई में नहीं, स्वयं की कमाई में विश्वास रखें। जहाँ बाप की कमाई किस्मत के तालों को खोलने के लिए उत्सुक नहीं करती और पाप की कमाई किस्मत के खुले तालों को भी बंद कर देती है वहीं आप यानी स्वयं की कमाई हमारे भीतर आगे ब़ढने का जोश जगाती है। महिलाओं को आगे ब़ढने की प्रेरणा देते हुए संतश्री ने कहा कि महिलाएँ हाथों पर मेहंदी का नहीं, मेहनत का रंग लगाएँ। मेहंदी का रंग तो सात दिनों में उतर जाएगा, पर मेहनत का रंग जिंदगी भर बना रहेगा। किस्मत जगाने का पहला मंत्र देते हुए संतश्री ने कहा कि अगर आप शांति चाहते हैं तो जो हासिल है उसे पसंद कीजिए, पर सफलता चाहते हैं तो जिसे पसंद करते हैं उसे हर हाल में हासिल कीजिए। किस्मत जगाने के लिए दूसरों पर निर्भर रहना बेवकूफी है। जैसे भाप बनने के लिए पानी का उबलना और दीवार में कील ठोकने के लिए तकिये की बजाय हथौ़डा जरूरी है ठीक वैसे ही भाग्य को खोलने के लिए पुरुषार्थ जरूरी है। किस्मत जगाने के कुछ और मंत्र देते हुए संतश्री ने कहा कि हर व्यक्ति जीवन का लक्ष्य बनाए कि वह क्या बनना चाहता है, किस दिशा की ओर जाना चाहता है? अपने आत्मविश्वास को मजबूत रखे, स्वयं को कभी भी कम और कमजोर न माने, सदा मेहनत की कमाई में विश्वास रखे। संतश्री ने भजनों के माध्यम से भी उपस्थित श्रद्धालुआंे को प्रोत्साहित किया। इससे पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में मुनि शांतिप्रियसागरजी ने स्वस्थ रहने के टिप्स दिए। महामंत्री पुखराज कवा़ड ने बताया कि मंगलवार को सुबह ९ बजे गोल्ड जिम हॉल में विशेष सत्संग-प्रवचन होगा।

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