नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को सरकार से कहा कि वह ब्लू व्हेल चैलेंज जैसे वर्चुअल दुस्साहस वाले खेल अवरुद्ध करने के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करे। इस खेल की वजह से कथित रूप से आत्महत्या की अनेक घटनाएं हुई हैं। शीर्ष अदालत ने साइबर दुनिया में उपलब्ध चोकिंग गेम, साल्ट एंड आइस चैलेंज, फायर चैलेंज, कटिंग चैलेंज, आईबाल चैलेंज और ह्यूमन एम्ब्राइडरी गेम जैसे हिंसक और जीवन को खतरा पैदा करने वाले खेलों को फायरवाल (अवरुद्ध) करने के लिए दायर याचिका पर सरकार से जवाब भी मांगा है। फायरवाल एक ऐसी प्रणाली है जो निजी नेटवर्क की सामग्री तक अनधिकृत पहुंच को नियंत्रित करती है।प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस तरह की फायरवाल तैयार करने के लिए विशेषज्ञों की समिति गठित करने का निर्देश दिया। न्यायालय इस मामले में अब २७ अक्टूबर को आगे विचार करेगा। इस बीच, पीठ ने सभी उच्च न्यायालयों को इसी तरह की याचिकाओं पर आगे कार्यवाही करने से रोक दिया है।यह याचिका वकील और सामाजिक कार्यकर्ता स्नेहलता कलिता ने दायर की है। याचिका में इंटरनेट सर्विस प्रदाताओं, नेटवर्क सर्विस प्रदाताओं, वेब होस्टिंग सेवा प्रदाताओं और साइबर कैफे आदि को सावधानी बरतने और सभी कंप्यूटर संसाधनों का इस्तेमाल करने वालों को वर्चुअल डिजिटल गेम्स की व्यवस्था करने, उन्हें दिखाने और साझा करने से रोकने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश देने का अनुरोध किया है क्योंकि ये बहुत ही नुकसानदेह और जीवन को खतरा पहुंचाने वाले हैं। कलिता ने सरकार को यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया है कि भारत में कार्यक्रमों की छानबीन करने वाली सेवाओं में प्रत्येक केबल लैंडिंग स्टेशन में फायरवाल जैसी व्यवस्था की जाए।

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