बात बिना-बात
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श्रीकांत पाराशर

अब केवल दो दिन बचे हैं लोकसभा चुनाव के परिणाम आने में। लोग कयास पर कयास लगाए जा रहे हैं परंतु मोदी विरोधी भी दबी जुबान से कहते दिखाई दे रहे हैं कि आएगा तो मोदी ही। सब तरफ यही आवाज गूंज रही है। इस आवाज ने शायद आम आदमी पार्टी को परेशान कर दिया है। इसीलिए बिना वक्त गंवाये पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल ने रविवार को सुबह सुबह बिल्कुल ताजा शगूफा छोड़ा कि उनकी सुरक्षा में लगी पुलिस उनकी हत्या कर सकती है। उनका पीएसओ ही उनको मार सकता है। केजरीवाल कहते हैं कि भाजपा के इशारे पर उनके सुरक्षाकर्मी इंदिरा गांधी की तरह उनकी हत्या कर सकते हैं।

संपादक की कलम से
संपादक की कलम से

सब जानते हैं कि चुनाव पूरे हो चुके हैं, वोट प़ड चुके हैं, उनके उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में बंद हो चुकी है। इतना ही नहीं, परिणाम भी उनको पता है क्योंकि वे इस मामले में विशेषज्ञ हैं। वे तो पाताल में गड़ी किसी भी सीक्रेट चीज तक को पहचानने की काबिलियत रखते हैं तो फिर चुनाव परिणाम क्या चीज है। वे जानते हैं कि उनकी पार्टी को दिल्ली में बाबाजी का ठुल्लू मिलने वाला है इसलिए जनता का ध्यान भटकाने के लिए अपनी हत्या का शगूफा ले आए। उनको पता है आएगा तो मोदी ही। वैसे भी उनको कौन मारेगा और क्यों मारेगा?

सोशल मीडिया में कोई कह रहा था, मरे हुए को कोई क्यों मारेगा? वह इतनी बड़ी तोप अपने आपको समझते ही क्यों हैं? और अगर चप्पल जूतों की पिटाई से ही केजरीवाल ठीक हो सकते हैं तो फिर उनकी हत्या कोई क्यों करायेगा? हां, केजरीवाल ने इंदिराजी का उदाहरण देकर अपने आपको बड़ा नेता बनाने की कोशिश जरूर की है। जबकि वे इंदिराजी के नाखून के बराबर भी नहीं हैं। आज ही उनके चेले संजयसिंह भी चुनाव आयोग के पास पहुंचे परंतु अब क्या होगा, आएगा तो मोदी ही। अब तो दिल्ली में सातों सीटें ही नहीं गईं, आम आदमी पार्टी की अगली सरकार भी गई समझो।

इधर रविवार को सभी न्यूज चैनलों ने तेलगू देशम पार्टी के चंद्रबाबू नायडू के सभी प्रयासों का गु़ड गोबर कर दिया। इन चैनलों के एक्जिट पोल्स ने कांग्रेस ही नहीं, पूरे यूपीए को सत्ता के सपने से एक्जिट कर दिया है। इन चैनलों में कोई चैनल यूपीए की थोड़ी कम तो कोई थोड़ी ज्यादा सीटें दिखा रहा है परंतु सत्ता उसी की बनेगी यह तय हो गया है। चैनल कुछ भी बताएं, इतना तय हो गया है कि आएगा तो मोदी ही। इस बार के आम चुनाव में बंगाल में बहुत हंगामा रहा। चुनावी हिंसा भी खूब हुई है।

ममता ने साम दाम दंड भेद में से दंड के जरिये चुनाव जीतने के लिए दिन रात एक कर दिया। खुले आम मतदान केन्द्रों पर धांधली हुई। परंतु सब धरा का धरा रह गया क्योंकि आएंगे तो मोदी ही। अब ममता बनर्जी को फिर से मोदी को प्रधानमंत्री मानना होगा। उन्होंने कहा था कि वे मोदी को प्रधानमंत्री नहीं मानतीं। भारतीय लोकतंत्र में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को, प्रधानमंत्री मानने से इनकार किया था। अब झक मारकर उन्हें मोदी को प्रधानमंत्री मानना होगा क्योंकि आएगा तो मोदी ही।

तृणमूल के गुंडों ने बंगाल में जमकर गुंडागर्दी की। बम फो़डे, पोस्टर फाड़े, अमित शाह और अन्य भाजपा नेताओं के हेलीकॉप्टर नहीं उतरने दिए, रैलियां नहीं होने दी। लेकिन सच्चाई यह है कि अमित शाह और मोदी की रैलियों के अंडर करंट ने टीएमसी की चूलें हिला दीं। अब उत्तर प्रदेश में होने वाले घाटे को बंगाल पूरा करने जा रहा है। ममता मुख्यमंत्री तो हैं ही। उन्होंने जो प्रधानमंत्री बनने का सपना पाला था वह अचानक टूट गया है क्योंकि आएगा तो मोदी ही।

हालांकि चुनावों के परिणाम तो 23 मई को ही आएंगे परंतु बंगाल, उड़ीसा, आसाम, बिहार आदि प्रदेशों ने जिस प्रकार से वोटिंग की है, एनडीए के विरोधियों को जो थप्पड़ मारा है उससे समूचा विपक्ष ध्वस्त हो गया है। उ़डीसा में बीजू जनता दल से भी आगे निकल रही भाजपा ने बीजेडी से भी बड़ा झटका कांग्रेस को दिया है। कांग्रेस की बोलती ही बंद कर दी है क्योंकि मोदी विरोधी यह आश लगाए बैठे थे कि जरूरत पड़ने पर बीजू पटनायक का समर्थन मिल सकता है। वह आस धूल में मिल गई है। बांहें चढा चढा कर मोदी को जेल में डालने का दावा करने वाले राहुल गांधी के सपनों का अब क्या होगा इसकी बस कल्पना ही की जा सकती है क्योंकि आएगा तो मोदी ही।

उत्तर प्रदेश में साइकिल पर हाथी चढ तो गया परंतु इस जो़डी को जनता ने अपेक्षा के अनुकूल स्वीकार नहीं किया। यों भी कह सकते हैं कि सपा और बसपा के गठबंधन के बावजूद मोदी को यूपी ने पूरी तरह से नकारा नहीं। इसलिए कुछ सीटों का नुकसान होकर रह गया। मतलब साफ है सपा और बसपा के वोट आपस में ट्रांसफर नहीं हुए। दोनों के प्रतिशत जोड़कर जो खयाली पुलाव पकाया जा रहा था वह पतीले में ही चिपक गया। कांग्रेस को अछूत मानकर गठबंधन ने साथ लेने से इनकार कर दिया था इसका कुछ तो नुकसान गठबंधन को हुआ ही होगा। और हां, अखिलेश और मायावती का बड़बोलापन धूलधुसरित हो चुका है।

अगर एक्जिट पोल सही निकले तो इन दोनों नेताओं को सांत्वना देने वाला भी कोई नहीं मिलेगा। अब एक दूसरे पर इस हार का ठीकरा फो़डने की तैयारी शुरू हो गई होगी। आज के एक्जिट पोल देखकर एनसीपी के प्रमुख शरद पवार तो राजनीतिक आईसीयू में चले गए होंगे। उनके माजिद मेमन कल से टीवी पर ढूंढे नहीं मिलेंगे। यूपीए को मजबूत करने द्वार द्वार भटकने वाले चंद्रबाबू नायडू की खुद की हालत खुद के प्रदेश में ही दयनीय हो चुकी है। वे कल दिल्ली से आंध्र लौट आएं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

रविवार रात चैनलों पर मोदी विरोधी पैनलिस्ट मिनट मिनट में पानी पीते दिखाई दिए क्योंकि उनको भी पता है, आएगा तो मोदी ही। अमित शाह और मोदी ने अपनी प्रेस कान्फ्रेंस में पूर्ण बहुमत का भरोसा जताया था और अब कहा जा सकता है कि वे भी किसी ज्योतिषी से कम नहीं हैं। उनकी भविष्यवाणी सही होती दिख रही है। जो भी हो, इतना जरूर है कि आएंगे तो मोदी ही।

अमित शाह और मोदी ने अपनी प्रेस कान्फ्रेंस में पूर्ण बहुमत का भरोसा जताया था और अब कहा जा सकता है कि वे भी किसी ज्योतिषी से कम नहीं हैं। उनकी भविष्यवाणी सही होती दिख रही है। जो भी हो, इतना जरूर है कि आएंगे तो मोदी ही।

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