सांकेतिक चित्र
सांकेतिक चित्र

नई दिल्ली/भाषा। रीयल एस्टेट क्षेत्र के लिए 2019 अदालती प्रक्रियाओं समेत अन्य चुनौतियों के साथ ही संरचनात्मक सुधारों वाला साल रहा। इन संरचनात्मक सुधारों का नए साल में रीयल एस्टेट क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव सामने आने की उम्मीद है।

नारेडको के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि 2019 में रीयल एस्टेट क्षेत्र में वित्तीय अनुशासन, जवाबदेही और पारदर्शिता लाने को लेकर संरचनात्मक नीतिगत सुधार किए गए। उन्होंने कहा, नए साल में हमें इन सुधारों का लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार को आवास तथा शहरी बुनियादी संरचना जैसे क्षेत्रों के लिए सुधारात्मक उपायों पर ध्यान केंद्रित करके जल्द ही साहसिक वित्तीय निर्णय लेने की आवश्यकता है। इसके साथ ही मांग को बढ़ावा देने के लिये फिलहाल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) तथा व्यक्तिगत आयकर की दरों को कम करने की जरूरत है।

वर्ष 2019 के दौरान रीयल एस्टेट क्षेत्र की कई परियोजनाओं का मामला अदालतों के गलियारे से होकर गुजरा। उच्चतम न्यायालय द्वारा जुलाई में आम्रपाली समूह की धोखाधड़ी की जांच का आदेश दिया गया। इसके बाद प्रवर्तन निदेशालय ने इसकी जांच शुरू की। जेपी इंफ्रा के दिवाला एवं ऋणशोधन मामले में कंपनी को खरीदने के लिए सरकारी कंपनी एनबीसीसी और निजी क्षेत्र की सुरक्षा रियल्टी में प्रतिस्पर्धा पूरे साल चली। अंतत: दिसंबर में दूसरे दौर में बैंकों और घर खरीदारों ने एनबीसीसी की बोली को मंजूरी दे दी।

वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष के दौरान अर्थव्यवस्था को गति देने के लिये कॉरपोरेट कर की दरें घटाने के साथ ही सितंबर में अटकी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिये वैकल्पिक निवेश कोष के गठन की घोषणा की। उच्चतम न्यायालय ने आम्रपाली मामले की सुनवाई करते हुए दिसंबर में कहा कि इस समूह की अटकी परियोजनाओं को पूरा करने के लिये वैकल्पिक कोष के इस्तेमाल पर विचार किया जा रहा है।

नारेडको महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष तथा एकता वर्ल्ड के चेयरमैन अशोक मोहनानी ने कहा, रीयल एस्टेट क्षेत्र अभी देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 6-8 प्रतिशत का योगदान दे रहा है। वर्ष 2025 तक इसका योगदान 13 प्रतिशत तक पहुंच जाने का अनुमान है। यह रोजगार सृजन के संदर्भ में दूसरे स्थान पर है। रीयल एस्टेट के वाणिज्यिक और खुदरा क्षेत्रों ने आवासीय स्थानों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। सरकार द्वारा की गई पहल के कारण 2020 फलदायी होने का अनुमान है।

संपत्ति को लेकर परामर्श देने वाली कंपनी नाइट फ्रैंक इंडिया के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा कि सरकार ने 2019 में मांग व तरलता बढ़ाने के उपाय किए। हालांकि, आवासीय रीयल एस्टेट क्षेत्र सभी प्रयासों के बावजूद नरम रहा और सस्ते मकानों की श्रेणी को प्रोत्साहन दिये जाने से वर्ष की पहली छमाही में बिक्री में सालाना आधार पर मामूली चार प्रतिशत वृद्धि देखी गयी। हमें 2020 में को-वर्किंग, को-लिविंग और छात्रावास जैसी श्रेणियों में अच्छी प्रगति का अनुमान है।

गुडविल डेवलपर्स के प्रवर्तक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हकीम लाकड़ावाला ने भी इसी तरह की राय प्रकट करते हुए कहा, रीयल्टी क्षेत्र के लिए 2019 कई सुधारों वाला साल रहा और दूसरी छमाही में इस क्षेत्र में तेजी लौटने लगी। अटकी आवासीय परियोजनाओं के लिए सरकार द्वारा कोष बनाने, कॉरपोरेट कर की दरें घटाने, महंगी तथा किफायती आवास के लिए जीएसटी घटाकर क्रमश: पांच प्रतिशत और एक प्रतिशत करने जैसे उपायों से खरीदारों का भरोसा बढ़ा। जल्दी ही बजट भी आने वाला है। ऐसे में हम उपभोक्ता तथा निवेशक दोनों पक्षों के लिए सकारात्मक हैं।

सीबीआरई के चेयरमैन एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (भारत, दक्षिण पूर्वी एशिया, पश्चिम एशिया और अफ्रीका) अंशुमन मैगजीन ने कहा, आर्थिक नरमी के बाद भी विभिन्न क्षेत्रों में किए गए सुधार से 2019 में कारोबार जगत की धारणा में सुधार हुआ। इससे भारत कारोबार सुगमता सूचकांक में 63वें स्थान पर पहुंच गया। रियल एस्टेट क्षेत्र ने आर्थिक नरमी के बाद भी अच्छा प्रदर्शन किया। इस साल की पहली तीन तिमाही के दौरान किराए पर कार्यालय का क्षेत्र सालाना आधार पर 30 प्रतिशत बढ़कर 470 लाख वर्ग फूट पर पहुंच गया। खुदरा क्षेत्र में भी तेजी रही। लॉजिस्टिक्स में सालाना आधार पर 2019 की पहली छमाही में 31 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।