आज ल़डके-लि़डकियों में दुबला-पतला बने रहने की हो़ड-सी लगी रहती है। समाचार-पत्रों में दुबला-पतला रहने के कई प्रकार के विज्ञापन प्राय: देखने को मिलते हैं। आज स्लिम होना सुदंरता का चिन्ह बन चुका है। स्लिम रहने के लिए युवक-युवतियों को कई प्रकार के शारीरिक कष्ट भी सहने प़डते हैं और वे कई प्रकार की दवाइयों का सेवन भी करते हैं। आदर्श स्लिम शरीर देखने में सुंदर और आकर्षित तो लगता ही है, पर दुबले-पतले होने का शरीर पर कुप्रभाव भी प़डता है। कुछ लोग बिना सोचे-समझे डाइटिंग करना शुरू कर देते हैं, जिसके कारण शरीर में कई प्रकार की बीमारियां शुरू हो जाती है। दुबला व्यक्ति शीघ्र थक जाता है और पेट की बीमारियोंं की संभावनाएं दिन-प्रतिदिन ब़ढती ही जाती हैं। ठीक होने का नाम ही नहीं लेतीं।चिकित्सकों का कहना है कि जिस व्यक्ति का वजन लंबाई के मानक भार से १५ प्रतिशत से अधिक कम होता है, वे दुबले व्यक्ति की श्रेणी में आते हैं। उनके दुबले होने के कई कारण होते हैं। कई व्यक्ति बहुत पेटू होते है परंतु मोटे नहीं होते, क्योंकि उनके माता-पिता भी दुबले होते हैं।भारत में दुबले होने का प्रमुख कारण कुपोषण है। दुबले व्यक्ति अपने शरीर का तापमान भी नियंत्रित नहीं रख पाते, जिसके कारण इन व्यक्तियों की औसत आयु आम व्यक्तियों से काफी कम होती है। डॉ. बागी का कहना है कि आज के आधुनिक युग में सुंदर दिखने की तमन्ना से युवक-युवतियां बिना सोचे-समझे डाइटिंग पर उतर आए हैं। जिसके कारण एनोरेटिया नरवोसा रोग के शिकार बन रहे हैं। यह बीमारियां पश्चिमी देशों में ब़ढती जा रही हैं। आज हम पश्चिमी सभ्यता का अनुसरण कर रहे हैं। ऐसे रोगियों की संख्या महानगरों में लगातार ब़ढती जा रही है। एशियाई देशों में कुपोषण की समस्या ब़ढती जा रही है। आर्थिक तंगी के कारण पर्याप्त मात्रा में भोजन नहीं मिल पाता। कुछ लोग अपनी आदतों और विचारों के कारण संतुलित भोजन नहीं लेते और कुपोषण का शिकार हो जाते हैं।हमारी युवा पी़ढी इन दिनों मानसिक, शारीरिक और सामाजिक समस्याओं में उलझी प़डी है। शुरू-शुरू में नौजवान पी़ढी सुंदर और आकर्षित लगने के कारण अपनी इच्छा से भूखी रहती है। रोगी का वजन मानक वजन से १०-१५ किलोग्राम कम हो जाता है। उनकी कार्यक्षमता कम हो जाती है। उन्हें चक्कर आने शुरू हो जाते हैं। कब्ज हो जाती है। महिलाओं में मासिक धर्म में उलटफेर शुरू हो जाता है। खट्टी डकारें भी आनी शुरू हो जाती हैं। शरीर पीला प़डना शुरू हो जाता है, शरीर में खून की कमी हो जाती है। युवक-युवतियों में हीनभावना शुरू हो जाती है। मानसिक संतुलन भी बिग़डना शुरू हो जाता है।डाइटिंग करनी है तो समझदारी से करनी चाहिए। जितनी, कैलौरी आपको प्रतिदिन जरूरी है, लेनी चाहिए। भोजन नियमित करना चाहिए, ब्रेकफास्ट का भी समय निश्चित करना चाहिए। तली वस्तुओं से परहेज करना चाहिए।

LEAVE A REPLY