वरिष्ठ कांग्रेस नेता कर्ण सिंह
वरिष्ठ कांग्रेस नेता कर्ण सिंह

नई दिल्ली/भाषा। जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के कई प्रावधानों को समाप्त करने और दो केंद्र शासित प्रदेश बनाने के फैसले पर कांग्रेस आधिकारिक रूप से मोदी सरकार का विरोध कर रही है लेकिन उसके कई नेता पार्टी लाइन से हटकर बयान दे रहे हैं। जनार्दन द्विवेदी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, मिलिंद देवड़ा, रंजीत रंजन और अदिति सिंह के बाद अब वरिष्ठ नेता डॉ. कर्ण सिंह ने कहा है कि फैसले की पूर्ण रूप से निंदा करना सही नहीं, क्योंकि इसमें कई सकारात्मक बिंदु शामिल हैं।

डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि मुझे यह स्वीकार करना होगा कि संसद में तेजी से लिए गए निर्णयों से हम सभी हैरान रह गए। ऐसा लगता है कि इस बहुत बड़े कदम को जम्मू और लद्दाख सहित पूरे देश में भरपूर समर्थन मिला है। मैंने इस हालात को लेकर बहुत सोच-विचार किया है।

डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि निजी तौर पर मैं इस घटनाक्रम की पूरी तरह निंदा किए जाने से सहमत नहीं हूं। इसमें कई सकारात्मक बिंदु हैं। लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का निर्णय स्वागत योग्य है। दरअसल, सद्र-ए-रियासत रहते हुए मैंने 1965 में इसका सुझाव दिया था।

डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि 35ए हटाने का फैसला उचित है, क्योंकि इसकी वजह से कश्मीरी बेटियों को भेदभाव का सामना करना पड़ता था। गौरतलब है कि डॉ. कर्ण सिंह कश्मीर के आखिरी महाराजा हरि सिंह के बेटे हैं। वे जम्मू-कश्मीर के राज्याधिकारी, सद्र-ए-रियासत और पहले राज्यपाल भी रह चुके हैं।

जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद-370 के ज्यादातर प्रावधान संसद द्वारा समाप्त कर दिए गए हैं। साथ ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाने के विधेयक को भी मंजूरी मिल चुकी है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त करने के संबंध में घोषणा की थी। इससे जम्मू-कश्मीर के भूगोल के साथ ही सियासत में भी बड़ा बदलाव आना तय माना जा रहा है।

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