election commission of india
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नई दिल्ली/दक्षिण भारत। देश में लोकसभा चुनावों की घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता भी लागू हो गई है। दरअसल आचार संहिता निर्वाचन आयोग के ऐसे नियमों को कहा जाता है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के लिए बनाए गए हैं। इसके तहत प्रशासन में कई महत्वपूर्ण बदलाव आ जाते हैं। साथ ही उम्मीदवारों को भी इन नियमों के दायरे में रहकर ही चुनाव लड़ना होता है। नियमों के उल्लंघन पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

आचार संहिता लागू होने के बाद सार्वजनिक धन का उपयोग इस प्रकार के किसी भी आयोजन में नहीं किया जा सकता जिससे किसी राजनीतिक दल को लाभ होने की संभावना हो। इसके अलावा चुनाव प्रचार में सरकारी संपत्ति के इस्तेमाल पर भी पाबंदी होती है। आचार संहिता के दौरान कोई जनप्रतिनिधि सार्वजनिक धन से किसी निर्माण कार्य का शिलान्यास या उद्घाटन नहीं कर सकता।

दरअसल सरकारी घोषणाओं, लोकार्पण, शिलान्यास या भूमिपूजन आदि पर पाबंदी इसलिए लगाई जाती है ताकि ​कोई भी राजनीतिक दल या राजनेता जनता को लुभाने की कोशिश न कर सके। इस पाबंदी से चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष बनी रहती है।

आचार संहिता के जरिए यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि कोई राजनीति दल, उम्मीदवार आदि विभिन्न समुदायों के बीच जाति या धर्म के आधार पर वोट न मांगें और न ही ऐसे बयान दें जिससे समाज का सद्भाव प्रभावित हो। ऐसे में निर्वाचन आयोग संबंधित दल या व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।

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