गांव के पंच, निर्विरोध सरपंच, 4 बार लगातार सांसद; ऐसा है विष्णुदेव साय का सियासी सफर

दिलीप सिंह जूदेव ने उन्हें साल 1990 में चुनावी राजनीति में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया था

गांव के पंच, निर्विरोध सरपंच, 4 बार लगातार सांसद; ऐसा है विष्णुदेव साय का सियासी सफर

Photo: twitter.com/BJP4CGState

रायपुर/दक्षिण भारत। छत्तीसगढ़ भाजपा विधायक दल की बैठक में विष्णुदेव साय को राज्य का मुख्यमंत्री मनोनीत किए जाने के बाद उनके समर्थकों में खुशी की लहर है। साय ने तीन बार भाजपा की छत्तीसगढ़ इकाई का नेतृत्व किया है, जो उनके संगठनात्मक कौशल में केंद्रीय नेतृत्व के विश्वास को दर्शाता है।

एक छोटे-से गांव के पंच के रूप में अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले साय तेजी से आगे बढ़े और साल 2014 में केंद्र में भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के बाद उसमें खान, इस्पात राज्य मंत्री बने।

वे आदिवासी बहुल जशपुर जिले के एक छोटे से गांव बगिया के किसान परिवार से हैं, लेकिन राजनीति उनके खून में है। उनके दादा बुधनाथ साय साल 1947 से 1952 तक मनोनीत विधायक थे।

उनके ताऊ नरहरि प्रसाद साय जनसंघ के सदस्य थे और दो बार विधायक (1962-67 और 1972-77) रहे। इसके बाद सांसद चुने गए और जनता पार्टी सरकार (1977-79) में राज्य मंत्री रहे।

उनके पिता केदारनाथ साय के एक और बड़े भाई भी जनसंघ के सदस्य थे और तपकारा से विधायक (1967-72) रहे थे।

विष्णुदेव साय ने कुनकुरी के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाई की। वे स्नातक की पढ़ाई के लिए अंबिकापुर चले गए, लेकिन पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और साल 1988 में अपने गांव लौट आए।

वे साल 1989 में बगिया ग्राम पंचायत के 'पंच' चुने गए और अगले वर्ष निर्विरोध सरपंच बन गए। ऐसा कहा जाता है कि भाजपा के दिग्गज नेता दिलीप सिंह जूदेव ने उन्हें साल 1990 में चुनावी राजनीति में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया था।

उसी साल साय अविभाजित मध्य प्रदेश में तपकरा (जशपुर जिले में) से भाजपा के टिकट पर पहली बार विधायक चुने गए। उन्होंने साल 1993 के विधानसभा चुनाव में यह सीट बरकरार रखी।

उन्होंने साल 1998 में निकटवर्ती पत्थलगांव सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। बाद में वे लगातार चार बार - 1999, 2004, 2009 और 2014 - रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए।

हालांकि भाजपा ने उन्हें साल 2003 और 2008 के विधानसभा चुनावों में छत्तीसगढ़ के पत्थलगांव से मैदान में उतारा, लेकिन वे दोनों बार हार गए।

साल 2014 में मोदी के नेतृत्व में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद साय को इस्पात और खनन राज्य मंत्री बनाया गया।

वे छत्तीसगढ़ के उन 10 मौजूदा भाजपा सांसदों में से थे, जिन्हें साल 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए टिकट देने से इन्कार कर दिया गया था।

आदिवासी राजनेता ने साल 2006 से 2010 तक और फिर जनवरी-अगस्त 2014 तक भाजपा के छत्तीसगढ़ अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।

साल 2018 में राज्य में भाजपा की हार के बाद उन्हें 2020 में फिर से छत्तीसगढ़ में पार्टी का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई। विधानसभा चुनाव से ठीक एक साल पहले, 2022 में उनकी जगह ओबीसी नेता अरुण साव को ले लिया गया।

इस साल नवंबर में चुनावों से पहले, साय को जुलाई में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य नामित किया गया था। चुनाव में उन्हें कुनकुरी (जशपुर जिला) से मैदान में उतारा गया, जहां उन्होंने कांग्रेस के मौजूदा विधायक यूडी मिंज को 25,541 वोटों के अंतर से हराकर जीत हासिल की।

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