भारत-जापान रिश्ते

भारत-जापान रिश्ते

भारत और जापान के रिश्तों को लगातार दोनों देशों के प्रमुख नेताओं द्वारा मजबूत किया जा रहा है और दोनों ही देश गर्मजोशी से इस रिश्ते को आगे बढा रहे हैं। भारत और जापान के बीच हुए परमाणु करार से भारत को नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में ब़ढत मिलेगी और साथ ही ऊर्जा उत्पादन के वर्ष २०२२ के लक्ष्य तक पहुंचे की सम्भावना भी ऩजर आएगी। दोनों ही देशों के लिए आपसी रिश्तों को बेहतर करना एक शानदार विकल्प है। वर्ष २०१३ में जब भारतीय रूपए की स्थिति बहुत कम़जोर थी तब जापान ने अपने विदेशी मुद्रा कोष को भारत के लिए खोल दिए थे। जापान की मदद से रुपए की स्थिति में स्थिरता आई थी। विश्व की तीसरी सबसे ब़डी अर्थव्यवस्था जापान के पास भारत में निवेश के लिए कई अवसर हैं और जापान इसका भरपूर लाभ उठाना चाहता है। जापान अपने रक्षा क्षेत्र के उत्पादों को बनाने के लिए भारत के बाजार और ब़डे क्षेत्रफल का इस्तेमाल करना चाहता है। भारत को जापान की मदद से रक्षा क्षेत्र में नई तकनीक और विदेशी कारखानों पर निर्भरता कम करने का मौका मिलेगा। जापान और भारत के मजबूत रिश्तों से एशिया क्षेत्र में चीन का प्रभाव भी संतुलित बना रहेगा। चीन अपने ब़डे क्षेत्रफल और आबादी की वजह से कई बार जापान पर हावी होने की कोशिश करता रहता है। हालाँकि जापान आर्थिक और सैन्य रूप से बहुत मजबूत देश है परंतु भारत का साथ मिलने से चीन पर राजनीतिक कारणों से चीन पर दबाव बनाना जापान के लिए बहुत आसान हो जाएगा। जापान और भारत को अपने रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए दोनों की योजनाओं को क्रियान्वित करना होगा। जापान द्वारा भारत में ब़डा निवेश किया जा रहा है। भारत को भी इस निवेश का सही उपयोग करने के लिए योजनाओं के क्रियान्वयन पर ध्यान देने की जरूरत है। दिल्ली-मुंबई इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर भी समय से पीछे चल रहा है और साथ ही ऐसी कई अन्य परियोजनाएं भी सरकारी दांवपेंच में फंसी हुई है। नरेंद्र मोदी को खुद आगे ब़ढकर जापान के निवेश पर अपनी पैनी ऩजर बनाए रखनी होगी और अगर निवेशकों को किसी भी तरह की परेशानी आती है तो उसका हल निकलने पर दोनों देशों का यह रिश्ता मजबूत हो सकेगा। भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए भी यह एक बहुत सुनहरा अवसर है और आवश्यकता है रक्षा मंत्रालय की सक्रिय साझेदारी का। अगर आधुनिक हथियार और ल़डाकू विमानों के निर्माण में भारत आगे ब़ढने में सफल रहता है तो आने वाले समय में भारत एक ब़डी आर्थिक और सैन्य ताकत बनकर उभरेगा। जापान ने भारत की बहुत मदद की है अब समय है जापान के निवेश हितों को समझते हुए परियोजनाओं को क्रियान्वित करने की।

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