'करेंगे योग तो रहेंगे निरोग' - पश्चिम को योग से कैसे मिली 'सुकून' की सांस?

आज पूरी दुनिया में बज रहा है योग का डंका

'करेंगे योग तो रहेंगे निरोग' - पश्चिम को योग से कैसे मिली 'सुकून' की सांस?

Photo: PixaBay

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। आज भारत में ही नहीं, विदेशों में भी योग की लोकप्रियता बढ़ रही है। योग की शरण में आने से 'तन, मन और जीवन के 'असंतुलन' दूर होते हैं। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, योग मनुष्य को जोड़ना सिखाता है- देह को प्रकृति से और आत्मा को ब्रह्म से। 

भारत के योग को पश्चिम ने 'योगा' के नाम से अपनाया और आज पूरी दुनिया इसकी दीवानी है।  अमेरिका, कनाडा, आयरलैंड, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया, ब्रिटेन, नॉर्वे, नीदरलैंड, स्वीडन, डेनमार्क, जर्मनी ... जैसे देशों में बड़ी संख्या में लोग न केवल योगाभ्यास कर रहे हैं, बल्कि इस क्षेत्र में शोध कर ज्ञान-विज्ञान को अधिक समृद्ध बनाने में योगदान भी दे रहे हैं।

पश्चिम में मोबाइल फोन, कंप्यूटर और इंटरनेट के तेजी से प्रसार के बाद समाज में कई बदलाव आए। वहां पहले ही जिंदगी की रफ्तार दुनिया के कई देशों की तुलना में काफी ज्यादा थी। तो पश्चिम में योग की लोकप्रियता कैसे बढ़ी, चूंकि आधुनिक तकनीक की दस्तक के बाद तो वहां लोगों के पास ज्यादा सोचने के लिए समय ही नहीं होता था?

वास्तव में भौतिकता में सुख तलाशने की इस भाग-दौड़ के बाद पश्चिम को उस सुकून की जरूरत सबसे ज्यादा महसूस हुई, जो उसे सिर्फ योग दे सकता था। जब उन देशों में लोग योग से परिचित हो रहे थे, तब एक वर्ग ने इसका तीव्र विरोध भी किया था। उसने योग को खास धार्मिक मान्यताओं और रूढ़ियों से जोड़कर देखा, लेकिन समय के साथ ये भ्रांतियां दूर होती गईं। 

उस समय लोगों के जीवन की व्यस्तता के बारे में कहा जाता था कि अगर किसी व्यक्ति को रोक कर उसे तीन सेकंड की गहरी सांस लेने के लिए कहा जाए तो उसका जवाब होगा- 'मैं ऐसा करूंगा तो दुनिया मुझे तीन सेकंड पीछे छोड़कर आगे बढ़ जाएगी!'

हालांकि जब लोग योग से जुड़ने लगे, आसन-प्राणायाम आदि करने लगे, तब उन्हें महसूस हुआ कि सुकून की गहरी सांस उन्हें पीछे नहीं, बल्कि आत्मसाक्षात्कार की ओर लेकर जाएगी। 

विशेषज्ञों ने पाया था कि भौतिकता की चकाचौंध के कारण लोगों को ऐसे रोग होने लगे, जो पहले बड़े-बुजुर्गों को ही होते थे। इसके मूल में अनियमित दिनचर्या, प्रतिकूल आहार-विहार, जीवनशैली में बदलाव समेत कई कारण थे। 

उन लोगों को योग की शरण में आने से बहुत लाभ हुआ। आज पश्चिम सहित दुनिया के ज्यादातर देशों में योग के विख्यात केंद्र चल रहे हैं, जहां अनगिनत लोग स्वास्थ्य-लाभ प्राप्त कर चुके हैं और कर रहे हैं। इसीलिए कहा जाता है- करेंगे योग तो रहेंगे निरोग!

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