शाही दौर का एक अध्याय

शाही दौर का एक अध्याय

साम्राज्यवाद हर प्रकार से अनुचित है, जिसके खिलाफ भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने लंबी लड़ाई लड़ी, कई कुर्बानियां दीं


महारानी एलिजाबेथ के निधन के साथ ही ब्रिटेन के शाही दौर का एक अध्याय समाप्त हो गया। उन्होंने सात दशक लंबे कार्यकाल में देश-दुनिया में कई उतार-चढ़ाव देखे। हालांकि जब उन्होंने ताज पहना, ब्रिटिश साम्राज्यवाद के चंगुल से कई देश मुक्त होकर आज़ादी की खुली हवाओं में सांस ले रहे थे। उन्हें विरासत में ऐसा ब्रिटेन मिला, जहां यह पद मात्र दिखावटी रह गया था। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद खस्ताहाल ब्रिटेन में वह शक्ति और चमक नहीं रह गई थी, जो उससे पहले मौजूद थी। साम्राज्यवाद का सूर्य अस्त होते ही महारानी के पास भी वह शक्ति नहीं रही, जो पूर्ववर्ती महारानियों के पास रही थी। हालांकि उनके प्रति सम्मान बहुत रहा।

Dakshin Bharat at Google News
आज ब्रिटेन समेत दुनियाभर में लोग साम्राज्यवाद के खिलाफ विचार व्यक्त करते देखे जा सकते हैं, उसके बावजूद एलिजाबेथ के प्रति सम्मान में कमी नहीं आई। साम्राज्यवाद हर प्रकार से अनुचित है, जिसके खिलाफ भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने लंबी लड़ाई लड़ी, कई कुर्बानियां दीं। आखिरकार भारत आज़ाद हुआ। एलिजाबेथ का जीवन इस बात की भी मिसाल है कि जिनके साम्राज्य ने सूर्यास्त नहीं देखा था, वे कालांतर में नाम मात्र के शासक रह गए। अत्याचार, अनीति और दासता पर कायम राजपाट नहीं चला करते। ब्रिटेन के घोर अत्याचारों के कारण ही उसका पतन हुआ।

महारानी एलिजाबेथ को इसलिए भी याद किया जाएगा कि उन्होंने राजशाही से राज शब्द हटाकर सिर्फ शाही रहने दिया। उन्होंने लोकतंत्र पर जोर दिया और जवाबदेही की भावना को मजबूती दी। एलिजाबेथ चाहतीं तो खुद या परिवार को चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा बना सकती थीं। संभवतः उन्हें इसका क्षणिक लाभ मिल जाता, लेकिन दीर्घावधि में यह निर्णय शाही परिवार के लिए घाटे का सौदा ही होता। इसलिए उन्होंने अपना दायरा नहीं लांघा और सात दशक के कार्यकाल में सिर्फ ‘महारानी’ बनी रहीं, जनता से सम्मान पाती रहीं। बीच में राजपरिवार पर कई आरोप भी लगे। ये सवाल भी उठे कि अब राजशाही की क्या जरूरत है, जबकि ब्रिटेन लोकतांत्रिक मूल्यों का पक्षधर है?

एलिजाबेथ ने स्थितियों को कुशलतापूर्वक संभाला, फिर चाहे राजपरिवार में अलगाव का मसला हो या लेडी डायना की मौत की घटना। तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद इस परिवार पर लोगों का भरोसा बना रहा।

हालांकि एलिजाबेथ के निधन के बाद सोशल मीडिया पर यह सवाल भी चर्चा में है कि ‘साम्राज्यवाद की प्रतिनिधि’ रहीं महारानी के प्रति इतना सम्मान प्रदर्शित करने की क्या आवश्यकता है, जबकि उनके देश ने भारत को गुलाम बनाया। एलिजाबेथ ने 1952 में ताज पहना था, तब तक तो भारत आज़ाद होकर अपना संविधान भी लागू कर चुका था। निस्संदेह ब्रिटेन ने साम्राज्यवाद के दौरान भारत में जुल्म-ज्यादती की हदें पार कर दी थीं, लेकिन वर्तमान भारत-ब्रिटेन संबंध उस कड़वाहट की बुनियाद पर नहीं हैं। जिन्होंने हमारे देश में जुल्म किया, उनके प्रति हमारी भावनाएं वे ही होनी चाहिएं जो स्वतंत्रता सेनानियों की थीं, लेकिन आज के ब्रिटेन, उसके शासक वर्ग और नागरिकों से संबंधों का आधार परस्पर मैत्री होना चाहिए।

आज का ब्रिटेन 1922 का ब्रिटेन नहीं है और न आज का भारत 1947 का भारत है। वर्तमान परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं, जिनमें भारत को अपना हित देखना चाहिए। वह इस बात में भी निहित है कि ब्रिटेन के साथ मधुर संबंध रहें। आज भारतीय मूल के लाखों लोग ब्रिटेन में रहते हैं। उनमें से कई तो वहां की सरकार में उच्च पदों पर हैं। ऋषि सुनक वहां प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए। बहुत संभव है कि वे भविष्य में इस पद तक पहुंच जाएं।

आज हमें ब्रिटेन से मधुर संबंध रखते हुए उससे विज्ञान, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, अनुसंधान आदि में सहयोग जारी रखना चाहिए ताकि भारत विश्व पटल पर महाशक्ति के रूप में प्रतिष्ठित हो सके।

Tags:

About The Author

Dakshin Bharat Android App Download
Dakshin Bharat iOS App Download

Latest News

जितने साल से मोदी प्रधानमंत्री हैं, उतने साल जवाहरलाल नेहरू देश के लिए जेल में रहे थे: प्रियंका वाड्रा जितने साल से मोदी प्रधानमंत्री हैं, उतने साल जवाहरलाल नेहरू देश के लिए जेल में रहे थे: प्रियंका वाड्रा
Photo: priyankagandhivadra FB Page
कर्नाटक में भाजपा ने विपक्ष के रूप में अपनी ज़िम्मेदारियां छोड़ दी हैं: प्रियांक खरगे
'वंदे मातरम्' अंग्रेजों के लिए चुनौती और देश के लिए शक्ति की चट्टान बन गया था: प्रधानमंत्री
इंडिगो मामला: उच्चतम न्यायालय ने याचिका पर तत्काल सुनवाई से इन्कार किया
इंडिगो: सातवें दिन भी दिक्कत जारी, बेंगलूरु से 127 उड़ानें रद्द
पश्चिम बंगाल में ध्रुवीकरण का दांव
गोवा नाइटक्लब: मालिकों और कार्यक्रम आयोजकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज, सरपंच हिरासत में