कट्टरपंथियों की जीत

कट्टरपंथियों की जीत

कट्टरपंथ की राह किस हद तक जाती है, इसकी ताजा मिसाल पाकिस्तान में देखने को मिली है। कानून के एक शब्द को लेकर विवाद इतना भ़डका कि वहां कानून-व्यवस्था की ब़डी समस्या ख़डी हो गई। अंतत: जीत कट्टरपंथियों की ही हुई। सोमवार सुबह खबर आई कि पाकिस्तान के कानून मंत्री जाहिद हमीद ने इस्तीफा दे दिया है। कट्टरपंथियों की ओर से लगातार कई दिनों से विरोध प्रदर्शन जारी थे। कट्टरपंथी जाहिद पर ’’ईश निंदा’’ का आरोप लगा रहे थे। उनके इस्तीफे के बाद प्रदर्शनकारियों ने ११ दिन से जारी अपने आंदोलन को खत्म कर दिया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे इस्लामिक समूह तहरीक-ए-लब्बैक के प्रवक्ता एजाज अशरफी ने विजयघोष किया, ’’हमारी मुख्य मांग को स्वीकार कर लिया गया है।’’ पाकिस्तान में संवैधानिक पदों पर बैठने वाले लोगों की शपथ की भाषा में बदलाव से विवाद भ़डका था। पाकिस्तान सरकार ने पिछले दिनों नया चुनाव कानून पास कराया। उसका मकसद पनामा पेपर्स कांड में हटाए गए प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के सत्ताधारी दल पाकिस्तान मुस्लिम लीग का फिर नेतृत्व संभालने का रास्ता साफ करना बताया गया। इसी बीच शपथ की भाषा में मामूली बदलाव हो गया। पैगंबर मोहम्मद के आखिरी पैगंबर होने में यकीन जताने का शब्द नए कानून में प्रयुक्त हुआ। पहले शपथपूर्वक इसमें आस्था जताने का शब्द प्रयुक्त होता था। इस बदलाव के विरोध में कट्टरपंथी स़डकों पर उतर आए। राजधानी इस्लामाबाद में हिंसक प्रदर्शन करते हुए इन लोगों का कहना था कि शपथ में बदलाव किया जाना ईश निंदा करने जैसा है। सरकार के मुताबिक यह गलती मौलवी की खामी के चलते हुई। कट्टरपंथी मुसलमानों के विरोध के बाद बदलाव को वापस ले लिया गया। लेकिन उससे कट्टरपंथी संतुष्ट नहीं हुए।वे मांग करते रहे कि इस मामले की जिम्मेदारी लेते हुए कानून मंत्री इस्तीफा दें। इस पर जोर डालने के लिए उन्होंने इस्लामाबाद में हिंसा की। सुरक्षा बलों की कार्रवाई में २०० से ज्यादा लोग घायल हुए और करीब ६ लोगों की मौत हो गई। उसके बाद सारे देश में प्रदर्शनों का सिलसिला शुरू हो गया। तहरीक-ए-खत्म-ए-नबूवत, तहरीक-ए-लब्बैक या रसूल अल्लाह (टीएलवाईआर) और सुन्नी तहरीक पाकिस्तान (एसटीपी) जैसे संगठनों के करीब २,००० कार्यकर्ताओं ने दो सप्ताह से अधिक समय तक इस्लामाबाद एक्सप्रेस-वे और मुरी की घेराबंदी कर दी। आखिरकार उनकी जीत हुई। जनरल जिया-उल-हक के दौर में पाकिस्तान के इस्लामीकरण की जो शुरुआत हुई थी, यह ताजा घटना को उसकी तार्किक परिणति समझा जाएगा। इस घटना पर पूरी दुनिया की नजरें थीं। जिस प्रकार कट्टरपंथियों ने चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार को घुटने के बल बैठने को मजबूर किया, उससे पाकिस्तान की छवि पर एक और दाग लग गया है।

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