रियासी हमला: अब इन्साफ जरूरी

जब रियासी में हमला हुआ तो आतंकवादी जानते थे कि दिल्ली में देश की नई सरकार का शपथग्रहण समारोह हो रहा है

रियासी हमला: अब इन्साफ जरूरी

सुरक्षा बलों के पास न तो संसाधनों की कमी है और न इच्छाशक्ति की

जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में तीर्थयात्रियों की बस पर आतंकवादी हमला अत्यंत निंदनीय घटना है। इस बात में कोई संदेह नहीं कि इसके पीछे पाकिस्तान का हाथ है। वह जम्मू-कश्मीर में दशकों से अलगाववाद और आतंकवाद को भड़का रहा है। अब आम कश्मीरी उसकी साजिश का हिस्सा नहीं बनना चाहता, इसलिए वह भाड़े के आतंकवादियों को आगे कर ऐसी घटनाएं करवा रहा है, जो देश में तनाव की वजह बनें। भारत में लोग तीर्थयात्रियों के विश्राम के लिए धर्मशालाएं बनवाते हैं, भंडारे लगाते हैं, उनकी सेवा के लिए जरूरी इंतजाम करते हैं, जबकि पाकिस्तान तीर्थयात्रियों की हत्याएं करवाता है। उसने मासूम बच्चों को भी नहीं छोड़ा। कैसी राक्षसी सोच है! रंग में भंग डालना पाकिस्तान की पुरानी फितरत है। वह होली, दशहरा, दीपावली, ईद, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और अन्य शुभ अवसरों के आस-पास ऐसी हरकतें करता है, जिससे लोगों की खुशी ग़म में बदल जाए। भारतीय सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की सतर्कता एवं सूझबूझ से ऐसी ज्यादातर कोशिशें नाकाम कर दी जाती हैं। आम जनता को तो उनके बारे में पता ही नहीं चलता। कभी-कभी किसी कारणवश आतंकवादियों के नापाक मंसूबे काम कर जाते हैं। तब हमें नुकसान होता है। वास्तव में आतंकवादियों को ऐसे ही एक मौके की जरूरत होती है। जब रियासी में हमला हुआ तो आतंकवादी जानते थे कि दिल्ली में देश की नई सरकार का शपथग्रहण समारोह हो रहा है। उस दिन हमले का मतलब है- रंग में भंग डालने की कोशिश करना, देश को चुनौती देना, प्रचार पाने का एक घिनौना तरीका अपनाना।

आतंकवादियों ने घात लगाकर हमला किया। क्या उनके पास पहले से ऐसी सूचना थी कि तीर्थयात्रियों से भरी हुई बस आने वाली है? प्राय: ऐसे हमलों के लिए तैयारी करने से पहले सूचनाएं जुटाई जाती हैं। इससे संकेत मिलता है कि घटनास्थल के आस-पास आतंकवादियों का नेटवर्क रहा होगा। बेशक पिछले कुछ वर्षों में जम्मू-कश्मीर में बड़ी संख्या में आतंकवादी मारे गए हैं। रियासी के गुनहगारों का भी यही हश्र होगा, लेकिन उनके साथ-साथ आतंकवादियों का नेटवर्क तोड़ना जरूरी है। जो लोग आतंकवादियों के लिए 'आंख-कान' का काम करते हैं, जो उन्हें संसाधन उपलब्ध करवाते हैं, वे उनसे कम कसूरवार नहीं हैं। उन्हें 'भटके हुए नौजवान, गुमराह लोग' जैसे नाम देकर उनका गुनाह कमतर दिखाने की कोशिशें अब अस्वीकार्य हैं। उन पर शिकंजा कसते हुए कठोर दंड देना चाहिए। उक्त घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासन ने पीड़ितों को राहत देने के जो भी संभव उपाय थे, वे किए। उपराज्यपाल ने अनुग्रह राशि देने की घोषणा कर दी। पूरा देश रियासी हमले के पीड़ितों के साथ खड़ा है। इस हमले में जिन लोगों ने प्राण गंवाए, उनके 'अपने' तो ज़िंदगीभर दु:ख को भुला नहीं पाएंगे। जो लोग घायल हुए हैं, उन्हें भी यह घटना अप्रिय यादें देकर गई है। अब सरकार की जिम्मेदारी है कि इन्हें इन्साफ दिलाए। देश इस घटना के जिम्मेदार आतंकवादियों, उनके हिमायतियों और आकाओं का संहार होते देखना चाहता है। आतंकवादियों को पता चलना चाहिए, उन्हें महसूस होना चाहिए कि भारत के एक भी नागरिक का लहू बहाया तो अंजाम बहुत बुरा होगा। सुरक्षा बलों के पास न तो संसाधनों की कमी है और न इच्छाशक्ति की, देश की रक्षा के लिए वीरता और बलिदान की भावनाएं हमेशा सर्वोच्च स्तर पर रही हैं। इस हमले के जवाब में पाकिस्तान को दंड मिलना चाहिए। चूंकि आतंकवाद का नाला तो वहीं से निकल रहा है। जब पाक फौज और रेंजर्स को बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, उसी स्थिति में जम्मू-कश्मीर में शांति होगी।

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