'भारतीय भाषाएं और एक भाषायी क्षेत्र के रूप में भारत' विषय पर सम्मेलन का उद्घाटन किया

भारतीय भाषा परिवार पोर्टल का अनावरण भी जारी किया गया

'भारतीय भाषाएं और एक भाषायी क्षेत्र के रूप में भारत' विषय पर सम्मेलन का उद्घाटन किया

अधिक भाषाओं को शामिल करने की योजनाएं चल रही हैं

मैसूरु/दक्षिण भारत। केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) के निदेशक प्रो. शैलेंद्र मोहन ने मंगलवार को कई गणमान्य लोगों के साथ संस्थान के प्रीव्यू थिएटर में 'भारतीय भाषाएं और एक भाषायी क्षेत्र के रूप में भारत' नामक दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इसके बाद भारतीय भाषा परिवार पोर्टल का अनावरण किया गया।

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यह पोर्टल वर्तमान में 22 अनुसूचित भारतीय भाषाओं के शब्दों और वाक्यांशों सहित व्याकरणिक विशेषताएं और शब्दावली प्रस्तुत कर रहा है, जो भाषायी अन्वेषण में एक महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने आगामी लक्ष्यों पर जोर दिया और कहा कि 22 भाषाओं पर ध्यान केंद्रित करने वाली यह पहल व्यापक प्रयास की शुरुआत का प्रतीक है। भारत की भाषा संबंधी विविधता का व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए और अधिक भाषाओं को शामिल करने की योजनाएं चल रही हैं।

पोर्टल के योगदान पर प्रकाश डालते हुए, सीआईआईएल के निदेशक ने भाषायी, सांस्कृतिक, समाजशास्त्रीय और पुरातात्विक साक्ष्यों को शामिल करते हुए एकता के भंडार के रूप में इसकी भूमिका पर जोर दिया।

इस पहल के जरिए विद्यार्थी विभिन्न भारतीय भाषाओं में साझा की जाने वाली ध्वन्यात्मकता, लिपियों, व्याकरण और शब्दावली की उत्पत्ति में गहराई से जान सकेंगे। वे क्षेत्रीय और स्वदेशी भाषा संबंधी बारीकियों के संबंध में जानकारी प्राप्त करेंगे। साथ ही प्रमुख भारतीय भाषाओं में सामान्य वाक्यांश भी सीखेंगे।

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प्रो. शैलेंद्र मोहन ने कहा कि यह पहल बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के एनईपी के उद्देश्यों के अनुरूप है, जिसका लक्ष्य विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को भारत के विविध सांस्कृतिक परिदृश्य में सार्थक बातचीत के लिए आवश्यक भाषायी कौशल से लैस करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषा परिवार पहल वैज्ञानिक अध्ययन के माध्यम से एकता को बढ़ावा देकर भारतीय भाषाओं के विकास में समन्वय स्थापित करने के लिए स्थापित केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल) के प्रमुख उद्देश्यों के अनुरूप है।

डेक्कन कॉलेज, पुणे के वाइस चांसलर प्रो. प्रमोद कुमार पांडे ने पोर्टल बनाने में शामिल लोगों के सामूहिक प्रयास की सराहना की। उन्होंने भाषायी भिन्नता, जटिलताओं और इंडिक भाषाओं के भीतर कई भाषा परिवारों की उपस्थिति पर ध्यान केंद्रित करने वाले हालिया शोध पर प्रकाश डाला।

प्रो. पांडे ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय भाषा परिवार पहल का उद्देश्य इन भाषाओं के बीच समानता की पहचान करना है, जिससे एक एकीकृत राष्ट्र के रूप में भारत की अवधारणा को मजबूत किया जा सके।

सीआईआईएल के सहायक निदेशक (प्रशासन) डॉ. पंकज द्विवेदी ने इस अनूठी पहल में भाग लेने के लिए सभी गणमान्य व्यक्तियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुजॉय सरकार और अन्य सभी लोगों को धन्यवाद दिया, जिन्होंने पोर्टल के विकास और लॉन्च में अथक योगदान दिया।

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