एटीएस की सूझबूझ

यह तो गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) की सूझबूझ रही कि उसने बहुत सावधानी से काम लिया

एटीएस की सूझबूझ

अतीत में गुजरात एटीएस और पुलिस ने कई बड़ी कार्रवाइयां की हैं

गुजरात में अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल हवाईअड्डे से एकसाथ चार लोगों, जिन पर आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) से जुड़े होने का आरोप है, की गिरफ्तारी बहुत गंभीर मामला है। आईएसआईएस अपनी दहशत के साथ ही क्रूरता के लिए कुख्यात है। अमेरिका इसकी कमर तोड़ने के लिए इराक और सीरिया में बड़े स्तर पर कार्रवाई कर चुका है। उसने इसके शीर्ष नेतृत्व पर भी बहुत प्रहार किए हैं, लेकिन इस संगठन का पूरी तरह खात्मा नहीं हो सका है। यह संगठन अन्य देशों में अपनी जड़ें जमाने की कोशिशें कर रहा है। जो लोग अहमदाबाद में पकड़े गए, वे सभी श्रीलंकाई नागरिक हैं। अहमदाबाद में उनका आना इस लिहाज से भी बहुत गंभीर मामला है, क्योंकि यह शहर कारोबारी नजरिए से काफी अहमियत रखता है। अगर वे यहां बड़ी वारदात को अंजाम देने में कामयाब हो जाते तो उससे देश की अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निवेशकों और कारोबारी समुदाय में ग़लत संदेश जाता। यह तो गुजरात पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) की सूझबूझ रही कि उसने बहुत सावधानी से काम लिया और 'सही समय' पर आरोपियों को दबोच लिया। गुजरात के डीजीपी विकास सहाय ने जो जानकारी दी, उससे स्पष्ट होता है कि एटीएस के अधिकारियों ने आरोपियों तक पहुंचने से पहले बहुत मेहनत की। अहमदाबाद जैसे व्यस्त हवाईअड्डे पर हजारों यात्री आते-जाते रहते हैं। उनमें से चार 'यात्रियों' के बारे में सूचनाएं हासिल करना, उनका सत्यापन करना, टिकट-पासपोर्ट समेत जरूरी दस्तावेजों के बारे में जानकारी इकट्ठा करना, हवाईअड्डे पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों को सतर्क करना और गोपनीयता बनाए रखते हुए 'असल' लोगों तक पहुंचना ... यह कोई आसान काम नहीं है।

अधिकारियों को मामले से जुड़े पुख्ता सबूत भी जुटाने होते हैं, ताकि जिन लोगों को वे अदालत में पेश करें, उनके खिलाफ केस मजबूत हो। अगर भूल से भी गलत व्यक्ति को पकड़ लें या आधे-अधूरे सबूतों के साथ कार्रवाई करें तो पूरी मेहनत पर पानी फिर जाए! गुजरात लंबे अरसे से आतंकवाद के निशाने पर रहा है। अतीत में गुजरात एटीएस और पुलिस ने आतंकवादियों के नेटवर्क का पर्दाफाश करने और उनकी साजिशों को विफल करने समेत कई बड़ी कार्रवाइयां की हैं। पिछले साल अगस्त में एटीएस ने राजकोट से तीन लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन पर आतंकवादी संगठन अलकायदा से संबंध रखने का आरोप था। गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह-राज्य है। हमें नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान की फौज और आतंकवादी संगठनों की आंखों में गुजरात बहुत खटकता है। अहमदाबाद हवाईअड्डे से गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो यह मामला श्रीलंका और पाकिस्तान, दोनों देशों से जुड़ता दिखाई देता है। श्रीलंका में अप्रैल 2019 में ईस्टर बम धमाकों में आईएसआईएस का हाथ सामने आया था। इस देश से समय-समय पर ऐसे कई संदिग्ध पकड़े जा चुके हैं, जिनका आतंकवादी संगठनों की ओर झुकाव रहा है। उक्त चारों संदिग्धों के बारे में जांचकर्ताओं की ओर से जो बातें सामने आईं, उनसे खतरनाक इरादों का पता चलता है। इनका 'आका' पाकिस्तान में रहता है और वह हथियारों को इकट्ठा करने के बाद हमले को अंजाम देने के लिए जगह और वक्त बताने वाला था। आरोपियों ने पूछताछ के दौरान यह बताने से इन्कार किया कि वे असल में कहां आतंकवादी हमले को अंजाम देने की योजना बना रहे थे! क्या ये लोग इतने शातिर हैं कि अपने इरादे जाहिर नहीं कर रहे, ताकि इनके पूरे नेटवर्क का खुलासा न हो जाए? अथवा यह भी इनके 'आकाओं' की साजिश का हिस्सा है कि इन्हें उतनी ही जानकारी उपलब्ध कराई जाए, जिससे पकड़े जाने की स्थिति में अन्य लोग 'महफूज' रहें? ऐसे कई सवाल हैं, जिनके जवाब मिलने अभी बाकी हैं। उम्मीद है कि एटीएस की पूछताछ से इनका जल्द खुलासा हो जाएगा।

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