नेताओं-अधिकारियों को करोड़ों की रिश्वत! चेन्नई के 3 बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज

इनके समूहों के नाम लैंडमार्क हाउसिंग प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और केएलपी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड बताए गए हैं

नेताओं-अधिकारियों को करोड़ों की रिश्वत! चेन्नई के 3 बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज

डीवीएसी अधिकारियों ने गुरुवार को यहां बिल्डरों के कार्यालयों में औचक जांच की थी

चेन्नई/दक्षिण भारत। सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवी एंड एसी) ने पुलियान्थोपे के बिन्नी मिल परिसर में एक बहुमंजिला अपार्टमेंट के निर्माण के मामले में साल 2015 से 2017 के बीच सांसदों, विधायकों, चेन्नई निगम पार्षदों और कुछ सरकारी विभागों के अधिकारियों को रिश्वत देने के आरोप में तीन बिल्डरों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एक अग्रणी अंग्रेजी अख़बार में छपी रिपोर्ट में इनके समूहों के नाम लैंडमार्क हाउसिंग प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और केएलपी प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड बताए गए हैं।

जानकारी के अनुसार, यह एफआईआर 31 जनवरी को दर्ज हुई थी। इसमें आरोप लगाया गया है कि लैंडमार्क हाउसिंग प्रोजेक्ट्स लि. के प्रबंध निदेशक टी उदयकुमार और केएलपी प्रोजेक्ट्स प्रा.लि. के प्रबंध निदेशक सुनील खेतपालिया और मनीष परमार ने जनप्रतिनिधियों और सरकारी अधिकारियों को 50 करोड़ रुपए नकद दिए थे।

बता दें कि डीवीएसी अधिकारियों ने गुरुवार को यहां बिल्डरों के कार्यालयों में औचक जांच की थी। उन्होंने उदयकुमार, सुनील खेतपालिया और मनीष परमार के आवासों की भी तलाशी ली थी।

ऐसे सामने आया मामला

यह मुद्दा राजीव नायडू ने उठाया था। उन्होंने साल 2017 में मद्रास उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर कर अनुरोध किया था कि आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। उनके द्वारा संलग्न किए गए दस्तावेजों में टी उदयकुमार का आयकर अधिकारियों के सामने 15 और 16 दिसंबर, 2017 को दर्ज किया गया शपथपूर्वक बयान भी था।

रिपोर्ट के अनुसार, उदयकुमार द्वारा आयकर विभाग में एक शपथ पत्र दायर करने के बाद नायडू ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें कहा था कि साल 2015 से 2017 के बीच सांसदों, विधायकों, पार्षदों और अधिकारियों सहित विभिन्न लोक सेवकों को 50 करोड़ रुपए से अधिक नकद भुगतान किया गया था। 

न्यायालय ने दिया था यह आदेश

इस पर न्यायालय ने डीवीएसी अधिकारियों को आदेश दिया कि वे प्रारंभिक जांच करें और चार महीनों के भीतर कार्यवाही पूरी करें। उसके बाद प्रारंभिक जांच साल 2019 में की गई। अधिकारियों को 23 मार्च, 2020 को उदयकुमार के बयान की प्रतियां भी मिली थीं। वह बयान आयकर (जांच) सहायक निदेशक ने दर्ज किया था।

इसलिए दी गई रिश्वत 

​मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, उदयकुमार ने सरकारी, निजी अधिकारियों के अलावा उन जनप्रतिनिधियों के विवरण का खुलासा किया, जिन्होंने अनुचित ढंग से लाभ उठाया था। उन्होंने कहा कि बिन्नी लिमिटेड से 14.16 एकड़ जमीन खरीदते समय रिश्वत दी गई थी। यह राशि अतिक्रमणकारियों को हटाने, मंजूरी पाने और अन्य उद्देश्यों के लिए दी गई थी।

यहां बंटी राशि!

इसमें कहा गया है कि अन्नाद्रमुक के पूर्व सांसद बालागंगा को 23 लाख रुपए दिए गए। वहीं, द्रमुक कार्यकर्ता जवाहर को 33 लाख रुपए का भुगतान किया गया। इसी तरह, एक और द्रमुक कार्यकर्ता को 10 लाख रुपए दिए गए थे।

पूर्व विधायक नीलकंदन को 40 लाख रुपए, एक पूर्व सांसद (नाम का उल्लेख नहीं किया गया) को 1.67 करोड़ रुपए, एक अन्य व्यक्ति को 20 लाख रुपए और पूर्व पार्षद सरोजा को 2 लाख रुपए दिए जाने की बात सामने आई है।

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