मुइज्जू को यह क्या सूझी?

मुइज्जू के साथ उनकी पूरी मंडली है, जिसने चुनाव से पहले ही भारत-विरोधी रंग-ढंग दिखाने शुरू कर दिए थे

मुइज्जू को यह क्या सूझी?

मुइज्जू को अचानक क्या सूझी कि वे भारत के साथ वर्षों पुराने मधुर संबंधों को बिगाड़ने को उतारू हो गए?

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की चीन-यात्रा के दौरान जारी संयुक्त बयान पर यही कहा जा सकता है कि अब दूध की रखवाली बिल्ली के हवाले कर दी गई है! चीन, जो दूसरे देशों की संप्रभुता और स्वतंत्रता का सम्मान नहीं करता, जिसकी नजर हमेशा दूसरों की जमीन हड़पने पर ही रहती है, उसका यह कहना अत्यंत हास्यास्पद है कि (चीन) मालदीव के आंतरिक मामलों में 'बाहरी हस्तक्षेप का दृढ़ता से विरोध करता है' और इस द्वीपीय राष्ट्र की संप्रभुता और स्वतंत्रता को कायम करने में उसका समर्थन करता है। 

बहुत लोगों को तो यह समझ में नहीं आ रहा होगा कि मुइज्जू को अचानक क्या सूझी कि वे भारत के साथ वर्षों पुराने मधुर संबंधों को बिगाड़ने को उतारू हो गए! मुइज्जू के साथ उनकी पूरी मंडली है, जिसने चुनाव से पहले ही भारत-विरोधी रंग-ढंग दिखाने शुरू कर दिए थे। 

चुनाव के दौरान भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुखौटे लगाकर प्रचार करने के आपत्तिजनक तौर-तरीके अपनाए गए थे। मुइज्जू चीन के समर्थक हैं। वे खुद को बीजिंग का बड़ा वफादार साबित करना चाहते हैं। उनके तीन पूर्व मंत्रियों ने भारत और उसके प्रधानमंत्री के बारे में अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि मुइज्जू के निर्देशों के अनुसार ऐसा किया गया है। 

उन्होंने यही सोचा होगा कि इससे सोशल मीडिया पर थोड़ा-बहुत हंगामा होगा। उसके बाद लोग भूल जाएंगे। लेकिन उनका यह दांव उल्टा पड़ता नजर आ रहा है। भारत में जिन लोगों ने मालदीव घूमने का कार्यक्रम बनाया था, वे धड़ाधड़ टिकटें रद्द करवा रहे हैं। अब तक हजारों लोग ऐसा कर चुके हैं। इससे मालदीव के खजाने पर जोरदार चोट पड़ रही है। 

वहीं, पर्यटन मानचित्र पर लक्षद्वीप तेजी से उभरकर सामने आ रहा है। भारत सरकार को चाहिए कि यहां पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाओं को बढ़ावा दे। यात्रा कंपनियां भी कमर कस लें। इस बार छुट्टियों में बहुत बड़ी संख्या में लोग लक्षद्वीप घूमने का कार्यक्रम बनाएंगे।

जिस चीन के उकसावे में आकर मुइज्जू भारत से पुराने संबंधों को बिगाड़ने के लिए इतने उतावले हो रहे हैं, वे पहले यह तो जान लें कि आज तक ड्रैगन ने कितने देशों की संप्रभुता और स्वतंत्रता का सम्मान किया है? इसने तिब्बत को हड़प लिया। शिंजियांग को हड़प लिया। सीओके पर अवैध कब्जा कर रखा है। यह ताइवान को युद्ध की धमकियां देता रहता है। हांगकांग में लोकतंत्र समर्थकों का निर्ममता से दमन किया। भारत के अरुणाचल प्रदेश से लेकर लद्दाख तक के इलाके पर इसकी कुदृष्टि है, लेकिन यहां भारतीय सेना के आगे इसकी दाल नहीं गल रही। 

चीन ने पाकिस्तान और श्रीलंका की अर्थव्यवस्था का बेड़ा गर्क कर दिया। श्रीलंका तो भारत की मदद से संभल गया, लेकिन पाकिस्तान के हालात सुधरने की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं है। चीन दर्जनभर देशों की जमीन पर दावा करता है। मालदीव उसके सामने क्या है? वह इस देश को कर्ज के जाल और मनमानी शर्तों में ऐसा उलझाएगा कि भविष्य में यहां के लोग खामियाजा भुगतेंगे। मुइज्जू ज्यादा दूर न जाएं, श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह को ही देख लें। 

चीन ने कर्ज के बदले जमीन हड़पने का वही दांव मालदीव में चल दिया तो कहां से देंगे? मालदीव तो खुद जमीन की कमी का सामना कर रहा है! जिस तरह जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग की समस्याएं बढ़ रही हैं, उससे समुद्र का जल-स्तर बढ़ रहा है। लिहाजा कुछ दशकों में मालदीव के कई इलाकों का अस्तित्व संकट में होगा। क्या मुइज्जू यह 'योजना' बनाकर चल रहे हैं कि भविष्य में जो होगा, देखा जाएगा, उससे पहले ही इस द्वीपीय राष्ट्र को औने-पौने दामों में बेचकर चलते बनें? 

मुइज्जू चीन से अनुरोध कर रहे हैं कि वह अपने पर्यटक मालदीव भेजे, ताकि भारतीय पर्यटकों के न आने से जो घाटा हुआ है, उसकी भरपाई हो जाए। वैसे, चीन में भी काफी समुद्र तट हैं, जहां बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। अगर बीजिंग के निर्देश पर कुछ पर्यटक मालदीव आ भी गए तो चीन, भारत की जगह नहीं ले सकता। मालदीव में समुद्री तूफान या सुनामी जैसी स्थिति हो या दवाइयों, खाद्यान्न, पेयजल, डेयरी उत्पादों की किल्लत, सबसे पहले भारत ही राहत लेकर पहुंचता है। मालदीव में आपात चिकित्सा स्थिति होने पर भारत के चिकित्सक ही लोगों का जीवन बचाने आते हैं। 

मालदीव के कई मरीजों के गंभीर ऑपरेशन भारतीय अस्पतालों में हुए हैं। और तो और, मालदीव में साल 1988 में तख्ता-पलट की कोशिश को विफल करने के लिए भी भारतीय सुरक्षा बल गए थे। अगर भविष्य में फिर कोई आपात स्थिति हुई तो मुइज्जू बीजिंग से चाहे जितना अनुरोध कर लें, इतनी जल्दी मदद नहीं आएगी। अगर आ भी गई तो ड्रैगन उसके कई गुना दाम किराए और ब्याज समेत वसूलेगा।

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