आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया गया, यह सोच दशकों हावी रही: मोदी

प्रधानमंत्री ने वाराणसी में स्वरवेद मंदिर के उद्घाटन के अवसर पर संबोधन में कहा ...

आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का विरोध किया गया, यह सोच दशकों हावी रही: मोदी

'आजादी के 7 दशक बाद आज समय का चक्र एक बार फिर घूमा है'

वाराणसी/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अपने लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में स्वरवेद मंदिर के उद्घाटन के अवसर पर संबोधन में कहा कि संतों के सान्निध्य में काशी के लोगों ने मिलकर विकास और नवनिर्माण के कितने ही नए कीर्तिमान गढ़े हैं। सरकार, समाज और संतगण सब साथ मिलकर काशी के कायाकल्प के लिए कार्य कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज स्वरवेद मंदिर बनकर तैयार होना इसी ईश्वरीय प्रेरणा का उदाहरण है। यह महामंदिर महर्षि सदाफल देवजी की शिक्षाओं और उनके उपदेशों का प्रतीक है। इस मंदिर की दिव्यता जितना आकर्षित करती है, इसकी भव्यता हमें उतना ही अचंभित भी करती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वरवेद मंदिर भारत के सामाजिक और आध्यात्मिक सामर्थ्य का एक आधुनिक प्रतीक है। इसकी दीवारों पर स्वरवेद को बड़ी सुंदरता के साथ अंकित किया गया है। वेद, उपनिषद, रामायण, गीता और महाभारत आदि ग्रंथों के दिव्य संदेश भी इसमें चित्रों के जरिए उकेरे गए हैं। इसलिए यह मंदिर एक तरह से अध्यात्म, इतिहास और संस्कृति का जीवंत उदाहरण है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक ऐसा राष्ट्र है, जो सदियों तक विश्व के लिए आर्थिक समृद्धि और भौतिक विकास का उदाहरण रहा है। हमने प्रगति के प्रतिमान गढ़े हैं, समृद्धि के सौपान तय किए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने कभी भौतिक उन्नति को भौगोलिक विस्तार और शोषण का माध्यम नहीं बनने दिया। भौतिक प्रगति के लिए भी हमने आध्यात्मिक और मानवीय प्रतीकों की रचना की। हमने काशी जैसे जीवंत सांस्कृतिक केंद्रों का आशीर्वाद लिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि गुलामी के कालखंड में जिन अत्याचारियों ने भारत को कमजोर करने का प्रयास किया, उन्होंने सबसे पहले हमारे प्रतीकों को ही निशाना बनाया था। आजादी के बाद इन सांस्कृतिक प्रतीकों का पुनर्निर्माण आवश्यक था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर हम अपनी सांस्कृतिक पहचान को सम्मान देते, तो देश के भीतर एकजुटता और आत्मसम्मान का भाव मजबूत होता, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण तक का विरोध किया गया था और यह सोच दशकों तक देश पर हावी रही।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के 7 दशक बाद आज समय का चक्र एक बार फिर घूमा है। देश अब लालकिले से गुलामी की मानसिकता से मुक्ति और अपनी विरासत पर गर्व की घोषणा कर रहा है। जो काम सोमनाथ से शुरू हुआ था, वह अब एक अभियान बन गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज काशी में विश्वनाथ धाम की भव्यता भारत के अविनाशी वैभव की गाथा गा रही है। आज महाकाल महालोक हमारी अमरता का प्रमाण दे रहा है। आज केदारनाथ धाम भी विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। बुद्ध सर्किट का विकास करके भारत एक बार फिर दुनिया को बुद्ध की तपोभूमि पर आमंत्रित कर रहा है। देश में राम सर्किट के विकास के लिए भी तेजी से काम हो रहा है और अगले कुछ सप्ताह में अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भी पूरा होने जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब बनारस का मतलब है - विकास, आस्था के साथ आधुनिक सुविधाएं, स्वच्छता और बदलाव। आज बनारस विकास के अद्वितीय पथ पर अग्रसर है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज एक बार फिर मैं आपके सामने 9 संकल्प, 9 आग्रह रख रहा हूं- 1- पानी की बूंद-बूंद बचाइए और जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक कीजिए। 2- गांव-गांव जाकर लोगों को डिजिटल लेन-देन के प्रति जागरूक कीजिए। 3- अपने गांव, शहर, मोहल्ले को स्वच्छता में नंबर 1 बनाने के लिए काम कीजिए। 4- जितना हो सके, लोकल को, स्थानीय प्रोडक्ट को प्रमोट कीजिए, मेड इन इंडिया उत्पादों का ही उपयोग कीजिए। 5- जितना हो सके, पहले अपने देश को देखिए, अपने देश में घूमिए। 6- प्राकृतिक खेती के प्रति किसानों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक कीजिए। 7- मिलेट्स यानी श्री अन्न को अपने जीवन में शामिल कीजिए, इसका खूब प्रचार-प्रसार कीजिए। 8- फिटनेस के लिए योग हो, स्पोर्ट्स हो, उसे भी अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाइए। 9- कम से कम एक गरीब परिवार का संबल बनिए, उसकी मदद कीजिए। यह भारत में गरीबी दूर करने के लिए जरूरी है।

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