नहीं बदली जा सकती है संविधान की बुनियादी संरचना : पाटिल

नहीं बदली जा सकती है संविधान की बुनियादी संरचना : पाटिल

कलबुर्गी। भाजपा के कुछ नेताओं की संविधान बदलने की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व केन्द्रीय गृह मंत्री और पंजाब के पूर्व राज्यपाल शिवराज पाटिल ने शनिवार को कहा कि संविधान की बुनियादी संरचना को बदला नहीं जा सकता है। यहां संवाददाताओं से बात करते हुए पाटिल ने कहा कि समाज की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए संविधान में संशोधन करना गलत नहीं है। अमेरिका, फ्रांस, रूस, चीन और अन्य देशों ने भी ऐसा किया है और कर रहे हैं। यहां तक कि भारत में भी अपनी सत्ता के दौरान कांग्रेस ने भारतीय संविधान में सौ बार से अधिक संशोधन किया है। उन्होंने कहा कि समय समय पर कुछ चीजें में बदलाव की आवश्यता होती है इसलिए संशोधित करने का काम होता है लेकिन संविधान के बुनियादी ढांचे कोई संशोधन नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हर दिन संविधान नहीं बदला जा सकता है।उन्होंने कहा कि संविधान में निर्धारित धर्मनिरपेक्षता, समानता और समाजवाद जैसे मूल लक्ष्यों को बदला नहीं जा सकता है। उन्होंने कहा कि संविधान को लागू करने में आने वाली समस्याओं और उसके क्रियान्वयन की विफलताओं को दूर करने के लिए हम सबको आगे आना होगा। उन्होंने कहा, संविधान के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी न केवल कार्यपालिका पर है बल्कि विधायिका, न्यायपालिका और मीडिया पर भी यह निर्भर है। उन्होंने कहा कि संविधान की मूल धारणा के अनुरूप ही हमारे देश में सरकारों को काम करना चाहिए। प्य्ज्झ्ष्ठद्भर्‍ घ्य्ब्त्रष्ठ त्र्ष्ठ द्यय्लट्टुझ्यत्र झ्ह्यत्रपाटिल ने लोकसभा अध्यक्ष के रूप में अपने एक कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रस्ताव किया था कि भारत को अपने राजनीतिक ढांचे में राष्ट्रपति प्रणाली को अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा, सोवियत संघ के बिखराव के बाद १९९० के दशक की शुरुआत में १८ स्वतंत्र देश अस्तित्व में आए थे। इससे उपजे हालात पर विचार करने के लिए मैंने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। बैठक में वाजपेयी ने भारत के लिए राजनीतिक ढांचे के राष्ट्रपति पद का प्रस्ताव दिया लेकिन अलग-अलग दलों के अन्य नेताओं के साथ मैंने भी उनके प्रस्ताव का जोरदार विरोध किया। गणतंत्र दिवस के दिन शुक्रवार को मुम्बई में विपक्षी दलों द्वारा आयोजित संविधान बचाओं रैली के औचित्य के सवाल पर पाटिल ने कहा कि उस रैली को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरोध में आयोजित रैली के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। ·र्ैंय्ैंख्श्नष्ठफ् फ्ष्ठ ·र्ैंह्ंश्च ्यप्रय्·र्ैंय्द्भत्र द्मब्र्‍्रकांग्रेस में पाटिल की पूछ घटने के सवाल पर उन्हांेने कहा कि मैंने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में सात बार लोकसभा का चुनाव जीता। यहां तक कि वर्ष-२००४ में जब मैं लोकसभा चुनाव हार गया तब भी मुझे केन्द्रीय गृहमंत्री बनाया गया और चार वर्ष बाद मैंने स्वेच्छा से इस्तीफा दिया था न कि कांग्रेस का दबाव था। उन्होंने कहा, इतना सब मिलने के बाद मैं कैसे कहूंगा कि मुझे कांग्रेस में किनारे लगा दिया गया है। संवाददाता सम्मेलन में राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री शरण प्रकाश पाटिल, विधायक बीआर पाटिल, अजय सिंह आदि उपस्थित थे।

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