शिक्षा के विस्तार के बिना विकास अर्थहीन : नीतीश

शिक्षा के विस्तार के बिना विकास अर्थहीन : नीतीश

पटना। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य और देश के चौतरफा विकास के लिए शिक्षा के महत्व को रेखांकित करते हुए मंगलवार को कहा कि शिक्षा के विस्तार के बिना विकास का कोई अर्थ नहीं है। नीतीश ने यहां शिक्षक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, राज्य और देश के विकास में शिक्षा का अहम योगदान है। यदि शिक्षा का विस्तार नहीं हो तो किसी भी प्रकार के विकास का कोई अर्थ नहीं होगा। हमने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है और इसके लिए राज्य के बजट का २० प्रतिशत से अधिक का आवंटन किया है।मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की अपील करते हुए कहा कि शिक्षक यह न सोचें कि वह केवल नौकरी कर रहे हैं बल्कि समाज में उनकी बहुत ब़डी भूमिका है। उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षकों के लिए बहुत कुछ किया है और आगे जो भी संभव होगा, वह किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नियोजित शिक्षकों के लिए सेवा-शर्त बनाई जा रही है और वह लागू भी की जाएगी। कुमार ने राज्य में शिक्षा का विस्तार करने के लिए उनकी सरकार की ओर से किए गए प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि जब पहली बार काम करने का अवसर प्राप्त हुआ तो उन्हें बताया गया कि १२.५ प्रतिशत बच्चे स्कूल से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध सरकार ने इसके लिए २० हजार से अधिक प्राथमिक विद्यालय खोले, प्राथमिक विद्यालयों को मध्य विद्यालय और मध्य विद्यालयों को उच्च विद्यालय में उत्क्रमित किया गया। इसके अलावा, व्यापक पैमाने पर शिक्षक नियुक्त किए गए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के विकास के लिए किए गए अथक प्रयास की बदौलत ही वर्ष २००६ में स्कूल से बाहर बच्चों का प्रतिशत घटा जो अब एक प्रतिशत से भी कम रह गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब राज्य के सामने सबसे ब़डी चुनौती शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि स्कूल जाना भी अपने आपमें शिक्षा का ही रूप है। इससे बच्चों में शिक्षा का एहसास होता है। उन्होंने कहा कि गरीबी के कारण पहले ल़डकियां ५वीं कक्षा के आगे नहीं प़ढ पाती थी। इसके मद्देनजर वर्ष २००७ में बालिका पोशाक योजना की शुरुआत की गई। इससे छात्राओं में उत्साह आया और मध्य विद्यालयों में उनकी संख्या ब़ढ गयी। उन्होंने कहा कि ल़डकियों को ८वीं से आगे प़ढने के उद्देश्य से प्रोत्साहित करने के लिए बालिका साइकिल योजना की शुरूआत की गई। उन्होंने कहा कि उच्च विद्यालयों में कक्षा नौ में प़ढने वाली ल़डकियों की संख्या भी एक लाख ७० हजार से ब़ढकर नौ लाख हो गई है। कुमार ने कहा कि यदि ल़डकियां नहीं प़ढेंगी तो समाज तरक्की नहीं कर पाएगा। यह शिक्षा के विस्तार का ही परिणाम है कि बिहार की प्रजनन दर ३.९ से घटकर ३.२ पर आ गया है। उन्होंने कहा कि प्रजनन दर के विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किये जाने पर स्पष्ट हुआ कि देश के किसी भी हिस्से में यदि पत्नी मैट्रिक पास है तो प्रजनन दर दो है, बिहार में भी ऐसी स्थिति में प्रजनन दर दो ही है। यदि पत्नी इंटर तक प़ढी है तो देश में प्रजनन दर १.७ है, वहीं बिहार में यह १.६ है।

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