स्वागत-योग्य फैसला

साइबर ठग शुरुआत में कुछ रुपए देकर लोगों को ललचाते हैं

स्वागत-योग्य फैसला

साइबर ठग आम लोगों को चूना लगाने के लिए नित नए हथकंडे अपना रहे हैं

संगठित अवैध निवेश और कार्य-आधारित अंशकालिक नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी करने वाली 100 से ज्यादा वेबसाइटों को केंद्रीय गृह मंत्रालय की सिफारिश के बाद बंद कर देने का फैसला स्वागत-योग्य है। इन वेबसाइटों के पीछे छुपे चेहरों को बेनकाब भी किया जाना चाहिए। साइबर ठग आम लोगों को चूना लगाने के लिए नित नए हथकंडे अपना रहे हैं। उनसे सावधान रहने के लिए समय-समय पर सलाह भी जारी की जाती है, लेकिन उनके जाल में फंसने वाले फंस ही जाते हैं। पिछले कुछ महीनों में जो मामले सामने आए हैं, उन पर गौर करें तो अचंभा होता है, क्योंकि ठगों के झांसे में आने वाले ज्यादातर लोग उच्च शिक्षित तबके से हैं। उनमें से कुछ लोग तो ऐसे हैं, जिन पर यह जिम्मेदारी है कि वे अन्य लोगों को साइबर ठगी के जाल से सावधान करें। एक कंपनी में उसकी वेबसाइट और डेटा की सुरक्षा से जुड़े कर्मचारी के पास वॉट्सऐप पर मैसेज आया कि वह दफ्तर में काम के समय के बाद अपने घर से कुछ वीडियो लाइक कर रोज़ाना हजारों रुपए कमा सकता है। उस व्यक्ति ने दिए गए प्रस्ताव की जांच किए बिना ही विश्वास कर लिया। फिर शुरू हुआ लुभाने का खेल। ठगों ने उसे कुछ यूट्यूब वीडियो के लिंक भेजे और उन्हें लाइक करने के लिए कहा। वह वैसा ही करता रहा। अगले दिन उसके पास 300 रुपए आ गए। उसे नया टास्क मिला। उसने फिर वीडियो लाइक किए। इस बार उसे 1,000 रुपए मिले। अब उसके मन में विश्वास हो गया कि वह 'सही' कंपनी से जुड़ा है। वह दिए गए टास्क पूरा करता रहा और इस बात को लेकर खुशी महसूस करता रहा कि उसके खाते में धनवर्षा होने वाली है। कुछ दिन बाद उसके सामने एक और प्रस्ताव पेश किया गया- 'अगर ज्यादा मुनाफा चाहिए तो हमारी एक योजना में धन निवेश कीजिए ... अगले हफ्ते दुगुनी रकम पाइए।' उसने अपनी एफडी तोड़ी, बचत खाते से रकम निकाली और पांच लाख रुपए 'निवेश' कर दिए। यह रकम भेजने के कुछ घंटे बाद उसे वॉट्सऐप व टेलीग्राम समूह से बाहर निकाल दिया गया! उसके पांच लाख रुपए डूब गए।

साइबर ठग शुरुआत में कुछ रुपए देकर लोगों को ललचाते हैं। जब यह सुनिश्चित कर लेते हैं कि 'शिकार' बातों में आ गया है तो उसकी पूरी जमा-पूंजी हड़पने का दांव चलते हैं। प्राय: ऐसे शातिर ठग विदेशों से वेबसाइटों का संचालन करते हैं, ताकि कानून की पकड़ से दूर रहें और जल्द से जल्द धन की निकासी कर लें। ठगी के ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए वेबसाइटों पर ताला लगाना काफी नहीं है। चूंकि जब भी किसी व्यक्ति को फंसाने की कोशिश की जाती है, तो उसमें सोशल मीडिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है। पिछले दिनों फेसबुक पर एक पोस्ट चर्चा में आई थी, जिसमें भारतीय यूजर्स को ध्यान में रखते हुए यह प्रस्ताव दिया गया था कि वे अपने देश के त्योहारों, पर्यटक स्थलों, खानपान, पहनावे आदि से संबंधित जानकारी पोस्ट कर कुछ ही दिनों में 'मालामाल' हो सकते हैं। उसके नीचे कई लोगों की टिप्पणियां मौजूद थीं, जो दिखने में भारतीय प्रतीत हो रहे थे। उनकी टिप्पणियां हिंदी में थीं। उनमें वे दावा कर रहे थे कि हमारे बैंक खातों में हजारों-लाखों रुपए आ गए ... यह काम तो बहुत ही आसान है ... हम इस वेबसाइट से जुड़ने की सिफारिश करते हैं! उन टिप्पणियों को पढ़कर कोई भी सामान्य व्यक्ति झांसे में आ सकता है। हां, जिस किसी ने एक बात पर गौर किया होगा, वह जरूर बच गया होगा। उन टिप्पणियों की भाषा वैसी नहीं थी, जैसी आम लोग लिखते-बोलते हैं। ठगों को पता होगा कि भारत में हिंदी ज्यादा समझी जाती है, इसलिए पहले तो उन्होंने अपनी भाषा में झूठी टिप्पणियां तैयार कीं। फिर इंटरनेट से उनका हिंदी में अनुवाद कर लिया। उस मशीनी अनुवाद ने ठगों की पोल खोल दी। सरकार को चाहिए कि वह सोशल मीडिया मंचों को नसीहत दे कि यूजर्स की सुरक्षा के प्रति गंभीरता दिखाएं; निवेश, अंशकालिक नौकरी, रिव्यू के जरिए धन कमाने और अन्य तरह के प्रलोभन देने वाले अकाउंट्स को तुरंत प्रभाव से बंद करें। ऐसा तंत्र विकसित करें कि प्रलोभन में इस्तेमाल होने वाले खास शब्दों का तुरंत संज्ञान लिया जाए। अगर कोई यूजर बार-बार ऐसी पोस्ट कर रहा है तो उसकी समीक्षा की जाए और संपर्क में आने वाले लोगों को अलर्ट जारी करते हुए उसका अकाउंट बंद कर दिया जाए। भविष्य में उस सिम, आईपी एड्रेस आदि से अन्य अकाउंट बनाने पर भी पाबंदी होनी चाहिए।

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