अविस्मरणीय दिन

अब इस विशाल भवन की ओर दुनिया की निगाहें होंगी

अविस्मरणीय दिन

लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिएं

भारत के इतिहास में 28 मई, 2023 का दिन अविस्मरणीय रहेगा। देश को नया संसद भवन मिल गया। यह भवन भारतवासियों की लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति और आशाओं का मूर्त रूप है। वर्ष 1947 में जब भारत आजाद हुआ था तो पश्चिम के कथित बुद्धिजीवियों ने हमारी क्षमता पर संदेह किया था। यह तक कहा था कि यहां लोकतंत्र सफल नहीं हो पाएगा। हमने संघर्ष किया, सीखा, कुछ ग़लतियां भी कीं, लेकिन आगे बढ़ते गए। 

आज हमारा नया संसद भवन उन कथित बुद्धिजीवियों को भी जवाब है कि वे गौर से देख लें, यह है दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का मंदिर। भारत की सनातन परंपरा सबको साथ लेकर चलने की रही है। नए संसद भवन में हवन हुआ और सभी धर्मों की प्रार्थनाएं भी की गईं। 

अब इस विशाल भवन की ओर दुनिया की निगाहें होंगी। न केवल इसकी बनावट और सुंदरता पर, बल्कि उन कार्यों पर भी, जो देश के लिए यहां से किए जाएंगे। यहां विभिन्न सत्रों में प्रश्न उठाए जाएंगे, बहस होगी, विधेयक लाए जाएंगे, कानून बनेंगे, कई कानूनी प्रक्रियाएं होंगी ... अब यहां बैठने वाले जनप्रतिनिधि नई ऊर्जा के साथ काम करें एवं देश को प्रगति के पथ पर और आगे लेकर जाएं। 

लोकतंत्र में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं होने चाहिएं। संसद भवन के उद्घाटन से पहले ही कुछ राजनीतिक दलों ने जिस तरह समारोह के बहिष्कार की घोषणा की, वह निस्संदेह उनका अधिकार था, लेकिन बेहतर होता कि इस दिन सब एक होकर ऐतिहासिक क्षणों के साक्षी बनते। ऐसे क्षण सदियों बाद आते हैं। 

यह भवन किसी व्यक्ति और पार्टी का नहीं है। यह देश का है। इसमें प्रयुक्त निर्माण सामग्री में सबके लिए बड़ा संदेश है। विभिन्न राज्यों से आए पत्थर, सीमेंट, बांस, लकड़ी, कालीन ... इन सबसे मिलकर यह सुंदर और मजबूत भवन बना है। इसी तरह सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और समस्त नागरिकों से हमारा भारत बनता है। हमारी एकता व सौहार्द से यह देश और शक्तिशाली बनेगा।

नए संसद भवन को राष्ट्र को समर्पित करने के समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उचित ही कहा है कि 'हर देश की विकास-यात्रा में कुछ पल ऐसे आते हैं, जो हमेशा के लिए अमर हो जाते हैं। कुछ तारीखें, समय के ललाट पर इतिहास का अमिट हस्ताक्षर बन जाती हैं। आज का यह दिन ऐसा ही शुभ अवसर है। देश आजादी के 75 वर्ष होने पर अमृत महोत्सव मना रहा है। इस अमृत महोत्सव में भारत के लोगों ने अपने लोकतंत्र को संसद के इस नए भवन का उपहार दिया है।' 

प्रधानमंत्री ने नए संसद भवन के लिए योजना को यथार्थ से, नीति को निर्माण से, इच्छाशक्ति को क्रियाशक्ति से, संकल्प को सिद्धि से जोड़ने वाली अहम कड़ी साबित होने की कामना की है। वास्तव में यह तभी हो सकता है, जब हर दल और हर सदस्य पूर्ण मनोयोग से अपना कर्तव्य निभाए, देशवासियों की भलाई के लिए हमेशा तत्पर रहे। 

जब नए संसद भवन के निर्माण की घोषणा की गई थी तो कई लोगों ने इसमें अड़ंगा डालने की कोशिश की। बस, किसी भी सूरत में काम बंद हो जाए, इसके मंसूबे बनाए गए, लेकिन वे समय के साथ नाकाम हो गए। यहां साठ हजार श्रमिकों ने सर्दी, गर्मी, बरसात ... हर मौसम में कड़ी मेहनत से पसीना बहाते हुए यह भवन देश को सौंप दिया। यह पुराने भवन से कई मायनों में बहुत बेहतर है। इसे आधुनिक तकनीक से बनाया गया है, जो अधिक सुरक्षित है। भविष्य में जब संसद सदस्यों की संख्या बढ़ेगी तो उनके लिए भी आसानी होगी। 

पुराने भवन में इतनी जगह नहीं थी। आज जिस तरह सदन की कार्यवाही में तकनीक का उपयोग बढ़ता जा रहा है, यह भवन उसके लिए बहुत अनुकूल है। इसमें सूर्य के प्रकाश का अधिकतम उपयोग हो सकेगा, बिजली की बचत होगी। इसके अलावा कई आधुनिक उपकरण स्थापित किए जाएंगे, जिनके लिए यहां पर्याप्त जगह होगी। 

यह भवन भारत के लोकतंत्र के साथ भारत की वैज्ञानिक प्रतिभा का भी प्रतीक है। नया संसद भवन भारत को हर क्षेत्र में बुलंदियों की ओर लेकर जाए। यहां से लिए गए फैसलों की बदौलत हमारा देश प्रगति, शक्ति, शांति, समृद्धि और लोक-कल्याण के नए कीर्तिमान स्थापित करे।

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