प्रसिद्धि का खतरनाक चस्का

अगर खतरनाक कारनामा करते वक्त चोट नहीं लगी और वीडियो वायरल हो भी गया तो उससे क्या हासिल हो जाएगा?

प्रसिद्धि का खतरनाक चस्का

पर्यटन, खेल, बहादुरी, नृत्य, संगीत आदि विषयों पर वीडियो बनाना गलत नहीं है, लेकिन इसके साथ विवेक से काम लेना जरूरी है

सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि पाने का चस्का लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। हाल में एक के बाद एक जो वीडियो सामने आए, उन्हें देखकर हैरत होती है। कई लोग अपनी और दूसरों की जान को सिर्फ इसलिए जोखिम में डाल देते हैं, ताकि उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाए, दुनिया उन्हें जाने, उनके बारे में बातें करे! इस किस्म के वीडियो बनाते हुए कुछ लोग जान तक गंवा चुके हैं, लेकिन प्रसिद्धि पाने का मोह ऐसा छाया हुआ है कि उल्टी-सीधी हरकतें बंद होने का नाम नहीं ले रहीं। क्या यह क्षणिक प्रचार जीवन से बढ़कर है? अगर खतरनाक कारनामा करते वक्त चोट नहीं लगी और वीडियो वायरल हो भी गया तो उससे क्या हासिल हो जाएगा? ऐसा तो नहीं है कि खुद की और दूसरों की जान जोखिम में डालकर वीडियो बनाने से कोई व्यक्ति इतिहास में 'अमर' हो जाएगा! सोशल मीडिया पर पोस्ट करने की ऐसी सनक पुणे में उन तीन युवाओं को बहुत महंगी पड़ सकती थी, जिनका वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया है। वीडियो में दिखाई दे रही लड़की अपने साथी का हाथ पकड़कर ऊंची इमारत से लटकी हुई थी। ऐसा काम करना कोई बहादुरी तो नहीं है। अगर ज़रा-सी भी चूक हो जाती तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। उसके बाद हर कोई सरकार और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराता। प्राय: ऐसे युवाओं पर उन फिल्मों का ज्यादा असर होता है, जिनमें कोई हीरो खतरनाक स्टंट करते हुए ऊंची-ऊंची इमारतों से छलांग लगाता है, आग की लपटों से घिर कर भी सुरक्षित निकल आता है, उड़ते हवाईजहाज को छलांग लगाकर पकड़ लेता है, एक ही वार से मजबूत दीवार को तोड़ देता है ... उसके बाद दो-तीन दर्जन गुंडों की पिटाई भी कर देता है!

युवाओं को यह नहीं भूलना चाहिए कि फिल्मों में ऐसे बड़े-बड़े कारनामों को अंजाम देने वाले 'हीरो' के साथ हुईं ये तमाम घटनाएं आधुनिक तकनीक का 'चमत्कार' हैं। जहां कहीं जोखिम होता है, वहां उसकी सुरक्षा के लिए पूरी टीम मौजूद होती है। पर्दे पर जैसा दिखता है, हकीकत में वैसा नहीं होता है। हीरो फिल्म में उड़ते विमान या हेलीकॉप्टर को एक ही छलांग में इसलिए पकड़ लेता है, क्योंकि यह कहानी का हिस्सा होता है। अगर फिल्म निर्माता ऐसे किसी दृश्य की अनुमति न दे तो 'हीरो' कितनी ही छलांग लगा ले, वह उड़ते विमान को पकड़ना तो दूर, अपने घर की छत पर बैठे कौए को भी नहीं पकड़ सकता। कई लोग वीडियो बनाते हुए उसमें इस तरह खो जाते हैं कि उन्हें पता ही नहीं चलता कि कितनी बड़ी मुसीबत में फंसने जा रहे हैं! हालांकि एक सामान्य व्यक्ति भी विवेकपूर्ण ढंग से विचार करे तो यह बता सकता है कि ऐसा करने का मतलब है- मौत को दावत देना। गुजरात के कच्छ में कुछ युवाओं का एक समूह अपनी कार को 'समुद्र के अंदर' इसलिए ले गया, क्योंकि सबको वीडियो बनाकर अपने सोशल मीडिया पर 'वाहवाही' हासिल करनी थी। वे लोग समुद्र की लहरों में ऐसे फंसे कि स्थानीय लोग उन्हें बाहर निकालकर लाए। अगर उन्हें समय पर मदद न मिलती और समुद्र की लहरें यूं ही थपेड़े बरसा रही होतीं तो बड़ा हादसा हो सकता था। इसी तरह एक महिला इंस्टाग्राम के लिए नृत्य का वीडियो बना रही थी, जिसकी गोद में उसका बच्चा था। इसी दौरान बच्चा नीचे गिर गया, उसके सिर में चोट लगी, लेकिन महिला हंसते हुए वीडियो बनाती रही! 'आत्मप्रचार' की यह लालसा कहां लेकर जा रही है? पर्यटन, खेल, बहादुरी, नृत्य, संगीत आदि विषयों पर वीडियो बनाना गलत नहीं है, लेकिन इसके साथ विवेक से काम लेना जरूरी है। खुद की या दूसरों की जान जोखिम में डालना अक्लमंदी नहीं है। सोशल मीडिया पर कुछ सेकंड के ऐसे वीडियो, जिसमें खुद की या दूसरों की जान को जोखिम में डाला गया हो, को वायरल करने से अपना नाम इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज नहीं हो जाता। अगर कोई युवा खुद को इतना बहादुर मानता है कि उसे समुद्र की शक्तिशाली लहरों से लेकर इमारतों की बुलंदियों तक ... कोई नहीं डरा सकता, तो उसे अपनी प्रतिभा सेना में भर्ती होकर सरहद पर दिखानी चाहिए। वहां बहादुरी का एक भी कारनामा कर दिखाया तो इतिहास में नाम अमर हो जाएगा। सिर्फ वीडियो वायरल करने के लिए इतना बड़ा जोखिम लेना अस्पताल, जेल या वहां पहुंचा सकता है, जहां से लौटकर कोई नहीं आता।

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