काशी तमिल संगमम का दूसरा चरण 17 से 30 दिसंबर तक होगा

'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' कार्यक्रम का दूसरा संस्करण

काशी तमिल संगमम का दूसरा चरण 17 से 30 दिसंबर तक होगा

जागरूकता सृजन और आउटरीच गतिविधियां आयोजित की जाएंगी

चेन्नई/दक्षिण भारत। आईआईटी मद्रास द्वारा अपने पंजीकरण पोर्टल के लॉन्च के साथ काशी तमिल संगमम (केटीएस) के दूसरे चरण के लिए मंच पूरी तरह तैयार है। तमिलनाडु और पुड्डुचेरी के इच्छुक लोग केटीएस पोर्टल काशीतमिल.आईआईटीएम.एसी.इन पर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 8 दिसंबर है।

इस 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' कार्यक्रम का दूसरा संस्करण 17 दिसंबर से 30 दिसंबर तक आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।

अपने पहले संस्करण की तरह, यह कार्यक्रम जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों को आपस में जोड़ने की सुविधा प्रदान करके वाराणसी और तमिलनाडु के बीच जीवंत संबंधों को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव करता है।

केटीएस के चरण 2 में यह प्रस्तावित है कि तमिलनाडु और पुड्डुचेरी से लगभग 1,400 लोग यात्रा समय सहित आठ दिवसीय दौरे के लिए ट्रेन से वाराणसी, प्रयागराज और अयोध्या की यात्रा करेंगे।

उन्हें लगभग प्रत्येक 200 को सात समूहों में विभाजित किया जाएगा, जिसमें छात्र, शिक्षक, किसान, कारीगर, व्यापारी के अलावा धर्मगुरु, लेखक, पेशेवर शामिल होंगे। हर समूह का नाम किसी पवित्र नदी, जैसे- गंगा, यमुना, सरस्वती, सिंधु, नर्मदा, गोदावरी और कावेरी के नाम पर रखा जाएगा।

प्रतिनिधियों को ऐतिहासिक, पर्यटक और धार्मिक रुचि वाले स्थानों का दौरा करने और उनके कार्यक्षेत्र से उत्तर प्रदेश के लोगों के साथ बातचीत करने के लिए ले जाया जाएगा। प्रतिनिधियों का चयन इस उद्देश्य के लिए गठित चयन समिति द्वारा किया जाएगा। चयन के बाद उन्हें आगे की प्रक्रिया के लिए सूचित किया जाएगा।

भारत सरकार का केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय इस कार्यक्रम के लिए नोडल मंत्रालय होगा, जिसमें एएसआई सहित संस्कृति मंत्रालय, आईआरसीटीसी, रेलवे, पर्यटन, कपड़ा, खाद्य प्रसंस्करण, एमएसएमई, आई एंड बी, एसडी एंड ई और उत्तर प्रदेश सरकार के संबंधित विभाग शामिल होंगे।  

पहले चरण से मिले अनुभवों का लाभ उठाने और अनुसंधान के लिए अपनी प्रतिष्ठा को देखते हुए, आईआईटी मद्रास और आईआईटी बीएचयू तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में संबंधित कार्यान्वयन एजेंसियों के रूप में काम करेंगे।

प्रतिनिधि यात्रा कार्यक्रम में आगे और वापसी की यात्रा के लिए दो-दो दिन शामिल होंगे; दो दिन वाराणसी में और एक-एक दिन प्रयागराज और अयोध्या में। कला और संस्कृति, हथकरघा, हस्तशिल्प, व्यंजन और तमिलनाडु और काशी के अन्य विशेष उत्पादों को प्रदर्शित करने वाले स्टॉल लगाए जाएंगे। वाराणसी के नमो घाट पर तमिलनाडु और काशी की संस्कृति का मिश्रण करने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इस अवधि के दौरान ज्ञान के विभिन्न पहलुओं, जैसे साहित्य, प्राचीन ग्रंथ, दर्शन, आध्यात्मिकता, संगीत, नृत्य, नाटक, योग, आयुर्वेद, हथकरघा, हस्तशिल्प के साथ-साथ आधुनिक नवाचार, व्यापार आदान-प्रदान, एडुटेक और अन्य पीढ़ी की अगली तकनीक और अकादमिक आदान-प्रदान जैसे सेमिनार, चर्चा, व्याख्यान आदि का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा विशेषज्ञों और विद्वानों, तमिलनाडु और वाराणसी से उपर्युक्त विषयों, व्यवसायों के स्थानीय व्यावहारिक व्यवसायी भी इन आदान-प्रदानों में भाग लेंगे, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में आपसी शिक्षण से व्यावहारिक ज्ञान/नवाचार का एक समूह उभर सके।

एक दिसंबर से 31 दिसंबर तक कार्यशालाओं, सेमिनारों, बैठकों और अन्य आउटरीच अभियान कार्यक्रमों के साथ तमिलनाडु के चिह्नित संस्थानों के तालमेल से समर्पित जागरूकता सृजन और आउटरीच गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।

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