पुलिस और जेल सुधार

पुलिस और जेल सुधार

हमारे देश में जेलों के बदतर हालातों पर गौर करते हुए उच्चतम न्यायलय ने कारागारों को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण दिशा निर्देश जारी किये हैं्। अब जिम्मा सरकार पर है कि उच्चतम न्यायलय द्वारा जारी किये गए दिशानिर्देशों पर प्रभावी तरीके से अमल किया जाए्। अगर न्यायलय द्वारा दिए गए सुझावों को लागू किया जाता है तो हमारे देश की जेलों की खराब हालत में सुधार आ सकेगा परंतु ऐसा होने के लिए सरकार को इस दिशा में गंभीरता दिखानी होगी। केवल जेल ही नहीं हमारे देश में बाल सुधार गृहों की भी हालात खस्ता है। जेलों और बाल सुधार गृहों में कई बार लोगों की संदेहस्पद परिस्तिथियों में मौत हो जाती है और ऐसी घटनाओं में मरने वाले लोगों के परिजनों को कई बार न्याय भी नहीं मिल पाता है और मुआवजा भी नहीं। मृत कैदियों के परिजनों को उचित मुआवजा देने का भी उच्चतम न्यायलय ने आदेश दिया है। अब सवाल यह है की क्या सरकार इन सुझावों पर गौर करेगी या उच्चतम न्यायालय द्वारा एक दशक से भी पहले पुलिस सुधारों की संदर्भ में दिए गए सुझावों की तरह अनदेखी कर देगी। पुलिस विभाग की बदहाली को देखते हुए पुलिसकर्मियों के कौशल विकास और कल्याण हेतु न्यायलय ने अनेक दिशानिर्देश दिए थे जिनकी अनदेखी की गयी है और अभी तक उनपर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है। अगर सरकार उच्चतम न्यायलय द्वारा सुझाये गए महत्वपूर्ण पहलुओं पर गंभीरता से गौर नहीं करेगी तो निश्चित रूप से यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। कई राजनैतिक दल भी नहीं चाहते कि पुलिस विभाग में आवश्यक सुधार लागू किये जा सकें्। पुलिस विभाग की पारदर्शिता और स्वतंत्रता से राजनेताओं को परेशानी हो सकती है और इसी कारणवश वह पुलिस सुधारों के विलम्ब के पक्ष में ख़डे ऩजर आते हैं्। जब पुलिस सुधारों के लिए हमारी सरकारों का रवैया निराशाजनक रहा है तो जेल सुधार के प्रति कोई बदलाव की उम्मीद नहीं करनी चाहिये बल्कि उच्चतम न्यायलय को अपने स्तर पर यह सुनिश्चित कराना प़ड सकता है कि जेलों सुधार और पुलिस सुधार के लिए न्यायालय द्वारा दिए गए दिशा निर्देश पर सरकारों द्वारा की जा रही कार्रवाई का ब्यौरा उसे समय समय पर दिया जाए। हमारे देश में अधिकांश थानों और जेलों की दशा दयनीय है और दोनों ही क्षेत्रों के आधुनिकीकरण की सख्त आवश्यकता है। साथ ही सरकारों को भी अपनी जिम्मेदारी समझते हुए इन सुधारों के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिये। अगर पुलिसकर्मी को आवश्यक सुविधाएं नहीं मिलेंगी और उसके कौशल विकास पर ध्यान नहीं दिया जाएगा तो उसका सीधा असर उसके काम पर दिखेगा। साथ ही मानवाधिकार को महत्त्व देने वाले हमारे देश में कैदियों को जेल में आवश्यक सुविधा देना भी अनिवार्य है।

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