शहर हैं बदहाल

शहर हैं बदहाल

मानसून की बारिश से हमारे शहरों की असली तस्वीर सामने आ रही हैं। भारी बारिश से हमारे शहरों की बुनियादी सुविधाओं की पोल खुल रही है। बेंगलूरु में गुरुवार को हुई भारी वर्षा से शहर के अनेक इलाकों में यातायात ठप्प हो गया था और साथ ही अनेक स्थानों पर जलभराव से भी नागरिकों को काफी समस्याओं का सामना करना प़डा था। इस वर्ष ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, पिछले दो महीनों में बेंगलूरु के निचले क्षेत्रों में कई बार जलभराव की समस्या सामने आई है। केवल बेंगलूरु ही नहीं, पिछले ही हफ्ते हैदराबाद में बादल फटने से हुई भारी बारिश से शहर में कई घंटों सडकों पर लोग फंसे रहे। कुछ ही समय पहले मुंबई में भी दो दिनों तक लगातार हुई बारिश से शहर ठप्प प़ड गया था। हमारे देश के अधिकांश शहर लगातार बारिश को क्यों नहीं झेल पाते हैं ? क्या शहरी जल निकासी प्रणाली में भारी खामियां हैं जिन्हंे बार-बार ऩजर अंदा़ज किया जाता है। क्या शहरों में अवैध अतिक्रमण भी इसका महत्वपूर्ण कारण है? क्या प्रशासन की इसमें गलती नहीं? ऐसे कई सवाल ़जहन में उठते हैं जिनका जवाब ढूं़ढना आवश्यक हो चला है। लगभग सभी शहरों में नालों और जल निकासी तंत्र में ब़डे सुधार करने की आवश्यकता है। अगर प्रति वर्ष होने वाली बारिश का ही सामना अगर हमारे शहर नहीं कर सकते हैं तो किसी प्राकृतिक आपदा का सामना करने में तो पूरी तरह से ही विफल ऩजर आएंगे। बारिश से जान-माल का नुकसान होना, गंभीर लापरवाही का ही नमूना है। बरसाती नालों को शहरों के जल निकासी तंत्र का अहम् हिस्सा माना जाता है परंतु नालों की खस्ता हालत पर कोई भी प्रशासनिक विभाग ध्यान नहीं देता है। एक तरफ प्रधानमंत्री विश्वस्तरीय शहरों का सपना देख रहे हैं वहीं दूसरी और प्रशासन शहरी मूलभूत सुविधाओं के लिए आवश्यक सुधारों पर ध्यान नहीं दे रहा है। अगर हमारे शहरों को अगली सदी के लिए तैयार करना है तो शहरों की मूलभूत सुविधाओं में आवश्यक सुधार लाने की आवश्यकता है। केवल जलनिकासी ही नहीं हमारे शहरों में बिजली आपूर्ति की जो प्रणालियाँ हैं वह भी आधुनिक नहीं हैं। हमारे शहरों को भविष्य के लिए तैयार करने की जिम्मेदारी हमारी सरकारों की है और इसके लिए आक्रामक तौर पर सुविधाओं में सुधार लाने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे। चाहे वह बरसाती नाले हों या स़डकें, शहरों की सभी मूल सुविधाओं के रख रखाव के लिए एक निर्धारित नीति बनाने की भी आवश्यकता है जिसके तहत अगर लापरवाही बरती जाती है तो संबंधित अधिकारी की छुट्टी कर देनी चाहिए। जिम्मेदारियों को अधिकारियों के बीच आवंटित कर देना चाहिए और किसी भी अधिकारी की पद्दोनत्ति उसकी कार्यकुशलता के आधार पर ही की जानी चाहिए।

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