आमेर: काम न आया पिलानिया का दल बदलना, नतीजों ने बदल दिए समीकरण

आमेर: काम न आया पिलानिया का दल बदलना, नतीजों ने बदल दिए समीकरण

जयपुर। राजस्थान की आमेर विधानसभा सीट इस बार खूब चर्चा में रही। साल 2013 के चुनावों में मामूली अंतर से जीते राजपा के नवीन पिलानिया ने इस बार पाला बदला और बसपा में शामिल हो गए। उन्होंने यह कदम स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखकर उठाया था लेकिन इस बार बाजी नवीन पिलानिया के हाथों से निकल गई।

आमेर सीट से आए नतीजों के मुताबिक, यहां भाजपा के सतीश पूनियां ने 93,132 वोट हासिल कर जीत दर्ज की है। कांग्रेस के प्रशांत शर्मा 79,856 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे। जबकि यहां से विधायक रहे बसपा प्रत्याशी नवीन पिलानिया को इस बार महज 15,994 वोट मिले और उनकी जमानत जब्त हो गई।

विधानसभा चुनाव से पहले बसपा का दामन थामने वाले नवीन पिलानिया ने साल 2013 में राजपा के टिकट पर आमेर से बाजी मारी थी। उस समय किरोड़ी लाल मीणा राजस्थान में राजपा के दम पर तीसरे मोर्चे का नारा बुलंद कर रहे थे। बाद में चुनाव नतीजों ने उन्हें निराश ही किया। चार सीटों पर जीतने वाली राजपा के इन विधायकों ने 2018 के चुनाव से पहले अलग—अलग राह अपना ली थी। किरोड़ी भी भाजपा में चले गए और राज्यसभा सांसद बन गए।

ऐसे में नवीन पिलानिया ने बसपा का रुख किया। उस समय उन्होंने कहा कि राजपा में रहकर बहुत कुछ करने की गुंजाइश नहीं थी। माना जा रहा था कि नवीन पिलानिया ने यह फैसला स्थानीय गुणा-गणित को ध्यान में रखकर किया। चूंकि पिलानिया साल 2013 के विधानसभा चुनावों में त्रिकोणीय मुकाबले के बाद सिर्फ 329 मतों के अंतर से जीत पाए थे।

पिलानिया ने यहीं से 2003 और 2008 में भी किस्मत आजमाई लेकिन सफलता नहीं मिली थी। लिहाजा उन्होंने आमेर में खुद को मजबूत करने के लिए बसपा का दामन थाम लिया। चूंकि इससे उन्हें बसपा का परंपरागत वोट मिलने के साथ ही खुद के साथ अब तक जुड़े रहे वोटों का भरोसा था। आमेर में चर्चा थी कि बसपा में जाकर नवीन पिलानिया ने खुद के लिए यह सीट सुरक्षित कर ली है, लेकिन जब नतीजे आए तो सभी समीकरण बदल गए। पिलानिया को पिछली बार से आधे वोट भी नहीं मिले और उनकी जमानत जब्त हो गई।

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