ईवीएम एवं वीवीपैट मशीन
ईवीएम एवं वीवीपैट मशीन

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। लोकसभा चुनाव प्रत्याशियों के लिए परीक्षा थे तो ईवीएम के लिए भी किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं थे। चुनाव अभियान के दौरान विपक्ष के नेताओं ने ईवीएम पर खूब सवाल उठाए। हालांकि चुनाव नतीजों के बाद ईवीएम मतों के अलावा वीवीपैट पर्चियों की गणना हो चुकी है। इनमें कोई अंतर नहीं आया है। ऐसे में यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि प्रत्याशी भले ही चुनावी इम्तिहान में पास या फेल हो गए लेकिन ईवीएम हर कसौटी पर खरी उतरी है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 20,600 पेपर ट्रायल मशीन के परिणामों में से 12,480 का मिलान किया जा चुका है। अब तक पर्चियों और ईवीएम मतों में कहीं भी अंतर नहीं पाया गया है। बता दें कि देश में यह पहला लोकसभा चुनाव था जब सभी ईवीएम के साथ वीवीपैट मशीनों को जोड़ा गया।

चुनाव आयोग ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र से पांच मशीनों का वीवीपैट से मिलान किया और इसमें कोई अंतर नहीं पाया गया। जब 23 मई को मतगणना हो रही थी तो विपक्ष के कुछ नेताओं ने वीवीपैट का मुद्दा भी उठाया कि यदि दोनों में अंतर पाया गया तो किसे सत्य माना जाएगा।

हालांकि चुनाव नतीजों के बाद दोनों में अंतर की स्थिति पैदा नहीं हुई। विपक्ष लंबे समय से ईवीएम हैकिंग के आरोप लगाता रहा है। खासतौर से चुनाव हारने के बाद ईवीएम पर जमकर निशाना साधा जाता है।

लोकसभा चुनाव के सातवें चरण के मतदान के बाद विपक्ष ने एक बार फिर उच्चतम न्यायालय का रुख किया और ईवीएम मतों और वीवीपैट पर्चियों के 100 प्रतिशत मिलान की मांग की। हालांकि 21 मई को उच्चतम न्यायालय ने विपक्ष की याचिका खारिज करते हुए कहा कि हम ऐसी याचिकाओं को बार-बार समय नहीं दे सकते।

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