प्रकृति और आपदाओं की कोई सीमा नहीं होती: मोदी

प्रधानमंत्री ने आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया

प्रकृति और आपदाओं की कोई सीमा नहीं होती: मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह खुशी की बात है कि सीडीआरआई का फोकस ग्लोबल साउथ पर है

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रकृति और आपदाओं की कोई सीमा नहीं होती। अत्यधिक परस्पर जुड़ी दुनिया में, आपदाएं और व्यवधान व्यापक प्रभाव डालते हैं। विश्व सामूहिक रूप से तभी लचीला हो सकता है, जब इसके देश व्यक्तिगत रूप से लचीले हों।

प्रधानमंत्री ने कहा कि साझा जोखिमों के कारण साझा लचीलापन महत्त्वपूर्ण है। सीडीआरआई और यह सम्मेलन हमें इस सामूहिक मिशन के लिए एक साथ आने में मदद करते हैं। साझा लचीलापन हासिल करने के लिए, हमें सबसे कमजोर लोगों का समर्थन करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह खुशी की बात है कि सीडीआरआई का फोकस ग्लोबल साउथ पर है। भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान एक महत्त्वपूर्ण कदम उठाया गया। चर्चा के केंद्र में वित्तपोषण के साथ एक नया आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य समूह का गठन किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सीडीआरआई के विकास के साथ-साथ ऐसे कदम दुनिया को लचीले भविष्य की ओर ले जाएंगे। मुझे यकीन है कि अगले दो दिनों में सीडीआरआई पर सार्थक विचार-विमर्श होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटे द्वीप विकासशील राज्यों (एसआईडीएस) में आपदाओं का खतरा अधिक है। सीडीआरआई का एक कार्यक्रम है, जो ऐसे 13 स्थानों पर परियोजनाओं को वित्तपोषित कर रहा है। डोमिनिकन गणराज्य में लचीले आवास और पापुआ न्यू गिनी में लचीले परिवहन नेटवर्क ऐसे उदाहरण हैं, जो प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों को बढ़ाते हैं।

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