सांकेतिक चित्र
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टोक्यो/दक्षिण भारत। कोरोना के कहर से जूझते चीन ने कहा है कि जापान द्वारा विकसित की गई फ्लूरोधी दवा एविगन इस वायरस से पीड़ित लोगों के इलाज में ‘स्पष्ट प्रभावी’ है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 80 मरीजों पर किए गए क्लिनिकल ट्रायल में इसके बेहतर नतीजे सामने आए हैं। ये लोग उन मरीजों की तुलना में जल्द ठीक हो गए जिन्हें यह दवा नहीं दी गई थी।

यह दवा जापान में साल 2014 में स्वीकृत की गई थी। इसका इस्तेमाल इबोला से पीड़ित मरीजों के इलाज में भी किया गया था। जापान टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि कोरोना वायरस के मरीजों के इलाज के लिए जापान भी एविगन के इस्तेमाल पर गौर कर रहा है।

जापान के स्वास्थ्य मंत्री कत्सुनोबू कातो ने एक कार्यक्रम में कहा, हम वह सबकुछ करेंगे जो कर सकते हैं, यह देखते हुए कि कोविड-19 के लिए अभी तक कोई स्थापित उपचार नहीं है। इस दवा को फेविपिरवीर के रूप में भी जाना जाता है।

उन्होंने कहा, ‘हम विदेशों से सुनते हैं कि इन्फ्लूएंजा के खिलाफ इस्तेमाल होने वाली दवाओं में से कुछ (दवाएं) उपयोगी हो सकती हैं।’ कातो ने संवाददाताओं से कहा कि उनका मंत्रालय यह जांच करेगा कि फ्लू की दवाएं बीमारी से लड़ने में कितनी कारगर हैं और यदि आवश्यक हो, तो कई चिकित्सा संस्थानों के लिए इन्हें मरीजों को देना संभव है।

एविगन को जापान की फुजीफिल्म टोयामा केमिकल कंपनी द्वारा विकसित किया गया था। इसे जापान में एक फ्लूरोधी दवा के रूप में स्टॉक किया गया था, लेकिन यह इबोला के इलाज में प्रभावी साबित हुई। अगर कोरोना से पीड़ित मरीजों के लिए यह फायदेमंद साबित होती है तो इससे कई लोगों का जीवन बचाया जा सकेगा।