जीवन में हमेशा सत्य बोलना चाहिए

कराड़/दक्षिण भारत । यहां के राजस्थानी जैन संघ में चातुर्मासार्थ विराजित आचार्यश्री महेन्द्रसागरसूरीश्‍वरजी ने कहा कि झूठ बोलना बुरी बात है। झूठ के कई प्रकार होते हैं जैसे मजबूरन झूठ बोलना, जानबूझकर झूठ बोलना, सफेद झूठ व काला झूठ आदि । आचार्यश्री ने कहा कि व्यक्ति को किसी भी हालत में झूठ बोलने से बचना चाहिए। झूठ बोलने का मौका भी आन पड़े तो मौन साध लेना चाहिए। किसी की झूठी तारीफ करना भी एक तरह का झूठ ही है इसलिए इससे भी बचना चाहिए। झूठ किसी भी तरह से बोला जाए झूठ तो झूठ ही होता है। झूठ हमेशा मन को विचलित करता है जबकि सत्य मन को हर पल शांत और प्रसन्न रखता है। सत्य से धैर्य व आत्मविश्‍वास में बढ़ोत्तरी होती है और बेवजह का झूठ बोलने का पाप नहीं होता। सत्य की आराधना आध्यात्म की नींव है जिसके परिणामस्वरुप चित्त की शुद्धता मिलती है। सच बोलना व सच का साथ देना एक अच्छी आदत ही नहीं अपितु जीवन जीने का तरीका है।