उच्चतम न्यायालय
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नई दिल्ली/दक्षिण भारत। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को राफेल लड़ाकू विमान सौदा मामले में दाखिल पुनर्विचार याचिकाएं खारिज कर दी हैं। चर्चित मामले में इस फैसले को केंद्र सरकार की बड़ी जीत माना जा रहा है। मामले की सुनवाई प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली संविधान पीठ ने की थी।

न्यायालय ने मोदी सरकार को क्लीन चिट देते हुए कहा कि पुनर्विचार याचिकाएं सुनवाई योग्य नहीं हैं। न्यायालय ने केंद्र की दलीलों को तर्कसंगत और पर्याप्त माना। न्यायालय ने इस दलील को खारिज कर दिया कि सौदे के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने की आवश्यकता है।

वहीं राफेल सौदे के संबंध में कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में की गई विवादित टिप्पणी पर उच्चतम न्यायालय ने नसीहत दी है। उसने कहा कि भविष्य में न्यायालय से संबंधित किसी भी मामले में राजनीतिक भाषण देने में सतर्कता बरती जाए। न्यायालय ने राहुल गांधी के माफीनामे को स्वीकार कर लिया।

बता दें कि राफेल मामले में न्यायालय के 14 दिसंबर, 2018 के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका के समर्थन में चुनिंदा दस्तावेज की स्वीकार्यता पर केन्द्र की प्रारंभिक आपत्तियां अस्वीकार करने के शीर्ष अदालत के फैसले के बाद दस अप्रैल को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने ये टिप्पणी की थी।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की पीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही के लिए लंबित इस मामले पर 10 मई को सुनवाई पूरी की थी। पीठ ने कहा था कि इस पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा।

राहुल गांधी उस वक्त कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष थे और उन्होंने पीठ से कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संबंधित अपनी टिप्पणी गलत तरीके से शीर्ष अदालत के हवाले से कहने पर वह पहले ही बिना शर्त माफी मांग चुके हैं।

राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पीठ से कहा था कि कांग्रेस नेता ने शीर्ष अदालत के मुंह में गलत तरीके से यह टिप्पणी डालने के लिए खेद व्यक्त कर दिया है।

हालांकि, भाजपा सांसद मीनाक्षी लेखी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा था कि गांधी की क्षमा याचना अस्वीकार की जानी चाहिए और उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

रोहतगी ने यह भी दलील दी थी कि न्यायालय को राहुल गांधी को अपनी टिप्पणियों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के लिये कहना चाहिए। राहुल गांधी ने आठ मई को राफेल फैसले में ‘चौकीदार चोर है’ की टिप्पणी शीर्ष अदालत के हवाले से कहने के लिए पीठ से बिना शर्त माफी मांग ली थी।