200 वस्तुओं को साथ याद रखने की विधि है महाशतावधान, बालमुनि पद्मप्रभचंद्र देंगे प्रस्तुति

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बेंगलूरु/दक्षिण भारत। किसी सामान्य व्यक्ति के दिमाग में कुछ 15-20 वस्तुएं, वाक्य या चित्र एक समय में याद रह पाते हैं। मोबाइल के इस युग में व्यक्ति अपने परिजनों के मोबाइल नम्बर तक भी याद नहीं रख पाता क्योंकि साधनों की भरमार व आपाधापी में व्यक्ति की याददाश्त बहुत ही कमजोर होती जा रही है।

ऐसे में यदि कोई 15 वर्षीय बालक एक साथ पूछे गए 200 प्रश्नों, दिखाए गए चित्रों व वस्तुओं को याद कर उन्हें उसी क्रम या उलटे क्रम में बता दे तो वह वास्तव में एक चमत्कार से कम नहीं माना जाएगा। ऐसा ही हैरंतअंगेज एक कारनामा 2 सितंबर को सुबह 9 बजे से पैलेस ग्राउंड के प्रिंसेज श्राइन सभागार में होने जा रहा है।

शहर के अक्कीपेट स्थित वासुपूज्य स्वामी जैन संघ में चातुर्मासार्थ विराजित आचार्यश्री नयचंद्रसागरसूरीश्वरजी एवं महाशतावधानी मुनिश्री अजितचंद्रसागरजी म.सा की प्रेरणा में महाशतावधान आयोजक समिति और अक्कीपेट संघ के तत्वावधान में ‘महाशतावधान महोत्सव’ का आयोजन किया जा रहा है जिसमें 15 वर्षींय बाल शतावधानी श्री पद्मप्रभचन्द्रसागरजी सभा में विभिन्न लोगों द्वारा पूछे गए प्रश्न व दिखाए गए चित्रों को क्रमवार बताएंगे और उत्तर देंगे।

महाशतावधानी मुनिश्री अजितचंद्रसागरजी म.सा. जिन्होंने वर्ष 2014 में मुम्बई में हजारों लोगों के समक्ष एक साथ पूछे गए 500 प्रश्नों के उत्तर, उसी क्रम में, जिस क्रम में पूछे गए थे, बताकर एक इतिहास का सृजन किया था। उनकी निश्रा में तैयार हुए बाल शतावधानी श्री पद्मप्रभचन्द्रसागरजी ने 10 वर्ष की उम्र में दीक्षा ग्रहण की थी और दो वर्ष की अथक साधना के बाद उन्होंने 100 प्रश्नों के उत्तर दिए थे।

वे इस बार 15 वर्ष की उम्र में 200 प्रश्नों के क्रमवार उत्तर देकर पुन: एक बार इतिहास का सृजन करने में जुट हुए हैं। मुनिश्री अजितचंद्रसागरजी म.सा. ने बताया शतावधान शब्द शत और अवधान दो शब्दों के संयोजन से बना है। शत मतलब सौ और अवधान का मतलब याद रखना। दौ सौ वस्तुओं को एक साथ याद रखने की अनोखी विद्या है महाशतावाधान।

शतावाधानी साधक अपने तप, त्याग, स्वाध्याय, साधना एवं ध्यान की शक्ति से सौ से अधिक वस्तुओं को भी याद रख सकता है। आश्चर्य की बात है कि याद की हुई वस्तुओं को साधक सीधे क्रम या उल्टे क्रम या फिर अनियमित क्रम में हजारों व्यक्तितों के सामने बता देता है।

अजितचन्द्रसागरजी ने बताया कि यह मां सरस्वती की साधना, एकाग्रता, याददाश्त, आईक्यू लेवल व आत्मसिद्धि से ही संभव हो पाता है। उन्होंने बताया कि इस चार घंटे के आयोजन की एक रिहर्सल इस रविवार को अक्कीपेट संघ के आराधना भवन में सुबह 9 बजे से की जा रही है।

पैलेस सभागार में होने वाले कार्यक्रम की सेम-टू-सेम रिहर्सल अक्कीपेट में होगी जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को इस आयोजन का लाभ मिल सके। इस आयोजन से जु़डे महाशतावाधान समिति के सदस्य कार्यक्रम की तैयारियों में जोरों से जुटे हुए हैं।

आचार्यश्री नयचंद्रसागरसूरीश्वरजी के कई शिष्य शतावधानी, महाशतावधानी के पद से अलंकृत हैं और उनके सभी शिष्यों ने अपनी अथक साधना से इस अनोखी विद्या को पाया है। आचार्यश्री ने कहा कि इस विद्या को जन-जन की विद्या बनाने के लिए तथा विद्यार्थियों में एकाग्रता व याददाश्त ब़़ढाने के उद्देश्य से वे श्री सरस्वती साधना रिसर्च फांउडेशन के तहत शिक्षकों की एक ऐसी टीम बनाने में जुटे हैं जो इच्छुक लोगों को इस विद्या का अध्ययन कराएंगे।

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