सभी की रक्षा करती हैं परमात्मा की प्रतिमाएं

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दक्षिण भारत न्यूज नेटवर्कविजयवा़डा। यहां आचार्यश्री जयन्तसेन सूरीश्वरजी म. सा. के शिष्य मुनिश्री संयमरत्नविजय जी म. सा., मुनिश्री भुवनरत्न विजय जी म. सा. एवं रामचन्द्रसूरीजी समुदायवर्तिनी साध्वीश्री धर्मज्ञाश्रीजी, पावनप्रज्ञाश्रीजी की निश्रा में शनिवार को आदिनाथ परमात्मा, लब्धिनिधान श्री गौतम स्वामी व श्रीमद् विजय राजेन्द्रसूरीजी की भव्य प्रतिष्ठा सिंगमराजुवारी स्ट्रीट में स्थित पाबु निकेतन के आदिनाथ गृह जिनालय में आनंद और उत्साह पूर्वक जयकारों के साथ हुई। प्रभु की प्रतिष्ठा होते ही गगन से पुष्पों की वृष्टि की गई। चारों ओर स्वर्ग जैसा माहौल हो गया। प्रतिष्ठा के पश्चात् विनीता नगरी में धर्म सभा का आयोजन हुआ। प्रवचन के पूर्व चेन्नई व गुंटूर श्री संघ ने मुनिद्वयश्री को अपने नगर में चातुर्मास करने की विनंती की। गुंटूर गौ संरक्षण संघम ने गौशाला में ३ मार्च को प्रतिष्ठा करवाने की विनंती की, मुनिश्री ने प्रतिष्ठा हेतु स्वीकृति प्रदान की। वेदमुथा परिवार के जोगराज ने अपने अंतर्मन के भाव प्रकट करते हुए सभी श्री संघों व मंडलों का आभार व्यक्त किया। प्रतिष्ठा निमित्त प्रवीण भाई ने दो उपवास की तपस्या की। प्रवचन में मुनिश्री ने वेदमुथा परिवार के सुकृत कार्यों की अनुमोदना करते हुए कहा कि सबकी माँ एक होती है,किंतु परमात्मा की प्रतिमा, प्रति व्यक्ति की माँ होती है,जो सबकी रक्षा करती है। जो माँ को प्रणाम करता है, वह चौवीसी तीर्थंकरों को प्रणाम कर लेता है। शिल्पी की मार सहने पर ही पत्थर प्रतिमा बनती है और उसकी पूजा होती है। जो मिटना जानता है, वही बनना जानता है। इसी प्रसंग पर मुनि संयमरत्न विजयजी द्वारा रचित पुस्तक ’’’’ज्ञानामृत से होती तृप्ति की अनुभूति‘ का व बालमंदिर के सुभाषित चित्रों का विमोचन हुआ। प्रवचन के पश्चात विजय मुहूर्त में पुलभावी स्ट्रीट के संभवनाथ जिनालय में दसवां ध्वजारोहण चतुर्विध संघ की निश्रा में हुआ। नौ वर्ष पूर्व इसी जिनालय में आचार्यश्री जयन्तसेन सूरिजी द्वारा भव्य प्रतिष्ठांजनशलाका हुई थी। दोपहर में बृहद् शांति स्नात्र महापूजन विधिकारक सत्यविजय जी हरण द्वारा पढाई गयी। रात्रि में विपिन पोरवाल ने प्रभु भक्ति कराई। रविवार को सुबह आदिनाथ गृह जिनालय का द्वारोद्घाटन होगा।

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