‘लिखे जो खत तुझे..’ जैसे अमर गीतों के रचनाकार गोपालदास नीरज का निधन

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Gopal Das Neeraj
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नीरज को अपने जीवन में काफी संघर्षों का सामना करना पड़ा था। जब वे सिर्फ छह साल के थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। उन्होंने इटावा की ​कचहरी में बतौर टाइपिस्ट काम किया था। वे एक कॉलेज में क्लर्क भी बने थे।

नई दिल्ली। प्रख्यात कवि गोपालदास नीरज का गुरुवार को निधन हो गया। वे 93 साल के थे। वे पिछले कई दिनों से बीमार थे। बुधवार शाम को उनकी तबीयत ज्यादा खराब होने पर उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। यहां शाम 7 बजकर 35 मिनट पर उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया। जानकारी के अनुसार, वे आगरा में रहने वाली अपनी बेटी कुंदनिका शर्मा के घर आए थे। मंगलवार सुबह उनकी तबीयत बिगड़ गई।

कवि को सांस लेने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। उन्हें इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। वहां उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया। उनके फेफड़ों में संक्रमण बढ़ने से सांस लेने में दिक्कत बढ़ती जा रही थी। इस दौरान उनके प्रशंसक व ​परिचित अस्पताल आए और उनसे मुलाकात की।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका बीपी सामान्य था। वे लोगों से मिले और बातचीत की। तब तक एम्स को उनकी रिपोर्ट दे दी गई थी। वहां डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें दिल्ली ले जाया गया। एम्स में उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। वहीं उनका देहांत हो गया।

गोपालदास नीरज को कई सम्मान प्राप्त हुए थे। उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण से भी नवाजा जा चुका है। उन्होंने साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया था। नीरज ने ​बॉलीवुड फिल्मों के गीत लिखे जो खासे मशहूर हुए।

नीरज को अपने जीवन में काफी संघर्षों का सामना करना पड़ा था। जब वे सिर्फ छह साल के थे, तभी उनके पिता का देहांत हो गया था। उन्होंने इटावा की ​कचहरी में बतौर टाइपिस्ट काम किया था। वे एक कॉलेज में क्लर्क भी बने थे। इसके बाद कॉलेज में हिंदी पढ़ाई। उन्हें असल पहचान उनकी रचनाओं से मिली।

उन्होंने बॉलीवुड के लिए ‘ए भाई जरा देखके चलो’, लिखे जो खत तुझे’, आज मदहोश हुआ जाए’ जैसे गाने लिखे। नीरज का जन्म 4 जनवरी, 1925 को उत्तर प्रदेश के इटावा में स्थित महवा में हुआ था। उनकी कई कविताएं ​स्कूल-कॉलेजों की पाठ्यपुस्तकों में शामिल की जा चुकी हैं।

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