imran and xi jinping
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वॉशिंगटन/दक्षिण भारत। पाकिस्तान को हर मोर्चे पर घेरने और कड़ा जवाब देने के लिए मोदी सरकार बड़े स्तर पर कोशिश कर रही है। कूटनीतिक मोर्चे पर सरकार के दांव से न केवल पाक, बल्कि उसका हिमायती चीन भी घिरता नजर आ रहा है। दरअसल अमेरिकी प्रशासन ने एक बयान जारी कर आतंकियों को आश्रय और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए पाकिस्तान के अलावा चीन को भी कठघरे में खड़ा किया है।

इस संबंध में ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि पाक और चीन संयुक्त राष्ट्र के प्रावधानों का जिम्मेदारी से पालन करें। बयान में कहा गया है कि दोनों मुल्क आतंकियों को आर्थिक सहायता और आश्रय देना बंद करें। अमेरिका ने पुलवामा में सीआरपीएफ जवानों पर आतंकी हमले को भयावह स्थिति करार दिया है। इस तरह आतंकवाद के अड्डे के रूप में दुनिया में कुख्यात पाकिस्तान के साथ चीन की साख पर सवालिया निशान लग रहा है।

अमेरिका कह चुका है कि आतंक के खिलाफ भारत को आत्मरक्षा का अधिकार है। माना जा रहा है कि ट्रंप प्रशासन भी आतंकवाद को मात देने के लिए भारत के कड़े रुख के समर्थन में आ रहा है। इसके तहत यदि पाकिस्तान स्थित आतंकी अड्डों पर भारत कोई कड़ी कार्रवाई करता है तो अमेरिका कूटनीतिक मोर्चे पर भारत का साथ दे सकता है। आतंकवाद के मुद्दे पर स्वयं ट्रंप का रुख काफी सख्त रहा है।

बता दें कि मौलाना मसूद अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कराने की दिशा में चीन अड़ंगा डालता आया है। वह कई बार पाक को आर्थिक सहायता दे चुका है, जिसका इस्तेमाल यह पड़ोसी मुल्क आतंकवाद फैलाने में करता है। साल 2017 में भी मसूद अजहर को ब्लैकलिस्टेड कराने के प्रस्ताव के अनुमोदकों में अमेरिका शामिल था।

माना जा रहा है कि अब पुलवामा हमले के बाद अमेरिका मसूद अजहर को ब्लैकलिस्टेड करवाकर पाक पर पाबंदियां लगा सकता है। इसका असर अफगानिस्तान में शांति प्रक्रिया पर भी हो सकता है। हालांकि इसकी काफी संभावना है कि चीन एक बार फिर अड़ंगा डालने की कोशिश करे। इसलिए अमेरिका ने पहले से चीन को संकेत देकर स्पष्ट कर दिया है कि ऐसा करना उसकी अर्थव्यवस्था की डगर को बेहद मुश्किल बना सकता है। पाक तो पहले ही खस्ताहाल है।

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