जीत से उत्साहित भाजपा के कार्यकर्ता
जीत से उत्साहित भाजपा के कार्यकर्ता

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। लोकसभा चुनाव और विधानसभा उप चुनावों की मतगणना के बाद राज्य की एक वर्ष पुरानी कांग्रेस-जनता दल (एस) की गठबंधन सरकार के सामने सत्ता से बाहर होने का तात्कालिक संकट घिरता नजर आने लगा है। राज्य विधानसभा में विपक्षी पार्टी भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर पर सवार होकर चुनाव में बेहद शानदार परिणाम हासिल करने में सफल रही है।

इसने राज्य में अधिकतम लोकसभा सीटें अपनी झोली में डाल ली हैं, जबकि उपचुनाव में दो में से एक विधानसभा सीट पर भी भाजपा का कब्जा हो गया है। मौजूदा रुझानों से राज्य में भाजपा को 25 लोकसभा सीटों पर जीत मिलने के स्पष्ट आसार नजर आने लगे हैं। दिलचस्प बात यह है कि भाजपा को कुछेक क्षेत्रों में नहीं, बल्कि पूरे राज्य में समान रूप से सफलता मिली है। हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र हो या मध्य कर्नाटक, पुराना मैसूरु हो या तटवर्ती कर्नाटक, हर जगह भाजपा के प्रत्याशियों को मतदाताओं ने पसंद किया।

पार्टी ने वर्ष 2014 के संसदीय चुनाव में कर्नाटक की 17 लोकसभा सीटों पर अपनी पक़ड बनाई थी। वहीं, इस वर्ष के चुनाव में यह आंकड़ा बढ़कर २४ पार कर चुका है। वहीं, सत्तासीन गठबंधन में शामिल कांग्रेस और जनता दल (एस) के प्रत्याशियों को लगभग हर जगह नकार दिया गया। उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में भाजपा की पहली जीत संगण्ण करडी के रूप में मिली। उन्होंने 37 हजार 424 मतों के अंतर से कोप्पल में चुनाव जीत लिया।

पिछली बार 2014 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 9, जेडीएस ने 2 और भाजपा ने 17 सीटें जीती थी, लेकिन इस बार भाजपा ने 25 सीटें जीतकर सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को भी हार का मुंह देखना पड़ा। इस चुनाव में कांग्रेस के पूर्व केन्द्रीय रेलमंत्री केएच मुनिप्पा, पूर्व मुख्यमंत्री एम वीरप्पा मोइली, प्रकाश हुक्केरी, विनय कुलकर्णी, सीएच विजयशंकर आदि वरिष्ठ नेताओं ने हार का मुंह देखा।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता आर वी देशपांडे ने कहा, देखिये हम भी हैरान हैं। ऐसा कैसे हुआ अभी समझ नहीं पा रहे। दूसरी ओर, कर्नाटक के सभी मौजूदा सांसद और खास तौर पर केंद्रीय मंत्रियों को इस चुनाव में भी बढ़त मिली हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में चली मजबूत लहर का उन सबको खासा फायदा मिला है।

वहीं, पहली बार भाजपा के टिकट पर संसद पहुंचने की कोशिश करनेवाले प्रत्याशियों को भी मोदी लहर का फायदा मिल रहा है, जिनमें वी. मुनिराजू (कोलार), तेजस्वी सूर्या (बेंगलूरु दक्षिण), अन्ना साहेब जोल्ले (चिक्कोड़ी), ए. नारायणस्वामी (चित्रदुर्गा) और डॉ. उमेश जाधव (कलबुर्गी) शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बीएस येड्डीयुरप्पा पूर्व में ही कई बार यह दावा कर चुके हैं कि 23 मई को लोकसभा और विधानसभा चुनावों की मतगणना के बाद राज्य में एक वर्ष पुरानी कांग्रेस-जनता दल (एस) गठबंधन सरकार का सत्ता से बाहर हो जाएगी और भाजपा यहां की सत्ता में वापसी करेगी। उनकी भविष्यवाणी मतगणना से आए रुझानों के प्रकाश में पूरी तरह सच होती नजर आ रही है।

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