digendra singh kargil hero
digendra singh kargil hero

सीकर/दक्षिण भारत। कारगिल युद्ध में हमारे जांबाज सैनिकों ने पाक के नापाक इरादों को ध्वस्त कर दिया था। इंटरनेट के दौर में ऐसे महावीरों की दास्तां देश के घर-घर में पढ़ी और सुनी जाती है। उस युद्ध में भारतीय सेना ने पाकिस्तानी फौज पर जोरदार धावा बोला। सेना के प्रहार से सहमा पाकिस्तान अपने फौजियों के शव तक नहीं लेने आया। राजस्थान के सीकर जिले के निवासी दिगेंद्र सिंह उस युद्ध में शामिल हुए थे। वे कारगिल युद्ध के अनुभव सुनाकर युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।

नायक दिगेंद्र सिंह महावीर चक्र विजेता हैं। वे सेना की 2 राज राइफल्स में सेवा दे चुके हैं। उन्होंने तोलोलिंग पहाड़ी की चोटी को पाकिस्तानियों से मुक्त कराया और 13 जून, 1999 की सुबह चार बजे वहां तिरंगा लहरा दिया। दिगेंद्र सिंह ने कड़ा मुकाबला करते हुए पाक के 48 जवानों को मार गिराया था। नीम का थाना तहसील के गांव झालरा में 3 जुलाई, 1969 को जन्मे दिगेंद्र सिंह को सेना में भर्ती होने की प्रेरणा अपने पिता से मिली, जिन्होंने पाक के खिलाफ 1948 के युद्ध में भाग लिया था। उनके मुख पर 11 गोलियां लगी थीं।

जब कारगिल युद्ध छिड़ गया तो तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने जवानों से पूछा- यह तिरंगा तोलोलिंग पर कौन लहराएगा? इसके जवाब में दिगेंद्र सिंह तुरंत खड़े हुए और यह जिम्मेदारी ली। उनके साथी और वे पहाड़ी पर कीलें ठोक कर रस्सी के सहारे ऊपर चढ़ते गए। दुश्मन ने तोलोलिंग पर 11 बंकरों पर कब्जा कर रखा था। दोनों ओर से भीषण मुकाबले में दिगेंद्र सिंह के नौ साथी शहीद हो गए थे। वे अकेले बचे थे। उन्हें भी पांच गोलियां लगी थीं।

दुश्मन को सामने देख दिगेंद्र ने वार जारी रखा। वे बंकरों में हथगोले फेंककर उन्हें तबाह करते गए। पहाड़ की चोटी पर पहुंचने के बाद उनका मुकाबला एक पाकिस्तानी अफसर मेजर अनवर खान से हुआ। वह भारत और भारतीय सेना के लिए अभद्र शब्द बोल रहा था। दिगेंद्र को अकेला और जख्मी हालत में देखकर उसने उन पर छलांग लगाई और यह लड़ाई हाथापाई में बदल गई। दिगेंद्र ने पाकिस्तानी मेजर पर पूरी ताकत से प्रहार किया। उसी दौरान उन्होंने अपना फौजी चाकू निकाला और उस पाकिस्तानी मेजर की गर्दन काट भारत मां का जयकारा लगा दिया।

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