उच्चतम न्यायालय
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नई दिल्ली। पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव और अगले साल लोकसभा चुनावों से पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को साफ कर दिया है कि इन विधानसभा चुनावों और आगामी आम चुनावों में मतदान ईवीएम के जरिए ही कराया जाएगा।

एक एनजीओ ने न्यायालय में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि मतदान प्रक्रिया ईवीएम के बजाय परंपरागत मतपत्र से कराई जाए। इस संबंध में एनजीओ का तर्क था कि ईवीएम का दुरुपयोग हो सकता है। ऐसे में निष्पक्ष चुनावों के लिए ईवीएम का उपयोग बंद होना चाहिए। इस पर सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि संदेह तो हर व्यवस्था पर जताया जा सकता है।

इसके बाद एनजीओ की याचिका खारिज कर दी गई। इस पीठ में सीजेआई के अलावा जस्टिस केएम जोसफ और जस्टिस एमआर शाह भी शामिल थे। ईवीएम को लेकर सर्वोच्च न्यायालय का रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक विपक्ष के कई दल इस पर सवाल उठा चुके हैं और आगामी चुनावों में इसके इस्तेमाल पर रोक की मांग कर चुके हैं।

खासतौर पर चुनाव हारने के बाद राजनीतिक दल ईवीएम पर इसका दोष मढना शुरू कर देते हैं। बता दें कि इसी साल अगस्त में जब चुनाव आयोग की सर्वदलीय बैठक हुई तो राजनीतिक दल ईवीएम के इस्तेमाल पर एकमत नहीं हो पाए थे। उनकी राय बंटी हुई थी। ईवीएम पर सवाल उठाने वाले दलों ने जब कभी किसी चुनाव में जीत हासिल की तो वहां नतीजों पर शक नहीं जताया।

बांग्लादेश भी कर रहा प्रयोग
ईवीएम से समय और श्रम की काफी बचत होती है। इसकी इन्हीं खूबियों से उत्साहित बांग्लादेश ने भी तय किया है कि वहां होने वाले आम चुनावों में ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि अभी यह प्रयोग सिर्फ कुछ ही स्थानों पर होगा। उसके नतीजों का अध्ययन करने के बाद आगामी चुनावों को लेकर कोई फैसला लिया जाएगा।

बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने कहा है कि ईवीएम से मतदान प्रक्रिया की गुणवत्ता में सुधार आएगा। बांग्लादेश स्थानीय सरकार के निर्वाचन में ईवीएम का आंशिक इस्तेमाल कर चुका है। उसके नतीजों के बाद अब संसदीय चुनावों में भी यह प्रयोग करना चाहता है।

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